कोलकाता।
पश्चिम बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन का बड़ा असर अब सूबे की नगर पालिकाओं और नगर निगमों में दिखने लगा है। राज्यभर के नगर निकायों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कब्जा लगातार कमजोर होता जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि कई शहरों के म्युनिसिपल बोर्ड पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गए हैं। कोलकाता नगर निगम से लेकर भाटपाड़ा, हलिशहर और उत्तर दमदम तक राजनीतिक उठापटक मची हुई है। चारों तरफ इस्तीफों और प्रशासनिक अव्यवस्था का दौर जारी है।

ममता की ‘कालीघाट बैठक’ भी नहीं आई काम
बिगड़ते हालात को देखते हुए टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हाल ही में कालीघाट स्थित अपने घर पर पार्षदों की एक इमरजेंसी बैठक बुलाई थी। उन्होंने साफ तौर पर अपील की थी कि कोई भी पार्षद अपना पद न छोड़े। लेकिन उनकी इस नसीहत का कोई असर जमीन पर नहीं दिख रहा है। इसी बीच दक्षिण दमदम के टीएमसी पार्षद संजय दास का शव फंदे से लटका मिलने के बाद से पूरी पार्टी में हड़कंप मच गया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि पुरानी घटनाओं को आधार बनाकर उनके पार्षदों को डराया और गिरफ्तार किया जा रहा है।
भाटपाड़ा और हलिशहर में एक साथ दर्जनों इस्तीफे
राज्य सरकार को सबसे बड़ा झटका हलिशहर और भाटपाड़ा नगरपालिका से लगा है। हलिशहर में चेयरमैन शुभंकर घोष समेत 16 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया। वहीं भाटपाड़ा नगरपालिका की स्थिति और भी बदतर है, जहां 35 में से 30 पार्षदों ने चेयरपर्सन रेबा साहा के साथ सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने वाले उप-नगर प्रमुख देवज्योति घोष का कहना है कि कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा था और काम करना असंभव हो गया था।
कोलकाता नगर निगम के बाहर सड़क पर हुई बैठक
राजधानी कोलकाता में तो अजीबो-गरीब स्थिति बन गई है। शुक्रवार को मेयर फिरहाद हाकिम और टीएमसी पार्षदों को नगर निगम भवन के बाहर सड़क पर बैठकर मीटिंग करनी पड़ी। आरोप है कि निर्देश के बाद भी उनके लिए हॉल का ताला नहीं खोला गया। उधर, उत्तर दमदम नगरपालिका में सैलरी न मिलने से नाराज कर्मचारियों ने गेट पर ताला लगाकर भारी हंगामा किया, जिसे शांत कराने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी।
सामने है मानसून, जनता भगवान भरोसे
इन सभी नगरपालिकाओं के टूटने से आम जनता की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ने वाली हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 10 से 16 जून के बीच बंगाल में मानसून दस्तक देने वाला है। ऐसे समय में जब नालों की सफाई और जलभराव से निपटने की तैयारी होनी चाहिए, तब नगर निकाय ठप पड़े हैं। राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने अफसरों के साथ बैठक कर दावा किया है कि मानसून से पहले बचे हुए 18 दिनों में वे स्थिति संभाल लेंगी और जनता को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।