महंगे और किल्लत वाले रासायनिक खादों को कहें बाय-बाय, धान की फसल के लिए रामबाण साबित होगा घर पर बना नील हरित शैवाल

जनधारा रिपोर्ट: अनूप वर्मा चारामा : आगामी खरीफ सीजन के तहत धान की फसल लगाने में अब महज एक महीने का समय शेष रह गया है। ऐसे समय में जब बाजार में रासायनिक खादों के दाम आसमान छू रहे हैं और सोसायटियों से लेकर मार्केट तक खादों की भारी किल्लत (कमी) देखी जा रही है, तब किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कृषि विभाग चारामा द्वारा हर ग्राम पंचायत में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य किसानों को महंगे रासायनिक खादों के चक्रव्यूह से निकालकर ‘शुद्ध जैविक खेती’ और आधुनिक कृषि तकनीकों की ओर मोड़ना है, ताकि लागत कम हो और पैदावार भरपूर मिले।


​सामग्री मिलना हुआ आसान, लाभ उठाने के लिए खुद आगे आ रहे किसान
​कृषि विभाग की इस अनूठी और जनकल्याणकारी योजना का जमीनी स्तर पर व्यापक और सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विभाग के अधिकारियों व मैदानी अमले की प्रेरणा से प्रभावित होकर ब्लॉक के अनेक प्रगतिशील और जागरूक किसानों ने अपने-अपने घरों के आशियानों, बाड़ियों और खेतों में खाली पड़ी जमीनों पर ‘हरित क्रांति’ की नींव रखनी शुरू कर दी है।
​अच्छी बात यह है कि नील हरित शैवाल टैंक बनाने के लिए आवश्यक सामग्री (जैसे चूना, उपजाऊ मिट्टी, सिंगल सुपर फास्फेट और त्रिपाल) स्थानीय बाजारों में बेहद कम दामों पर और बहुत आसानी से उपलब्ध हो जा रही है। सामग्री की इसी सुगमता के कारण क्षेत्र के किसान इस योजना का अधिक से अधिक मात्रा में लाभ उठाने के लिए खुद आगे आ रहे हैं और तेजी से अपने घरों-खेतों में शैवाल टैंक तैयार करने में जुट गए हैं।
​यूरिया की किल्लत का 100% देसी और शुद्ध तोड़
​कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की फसल में यूरिया का सबसे बेहतरीन, सुरक्षित और बेहद सस्ता विकल्प नील हरित शैवाल (BGA – Blue Green Algae) है। यह एक ऐसा शुद्ध जैविक खाद है जिसे किसान भाई इस एक महीने के भीतर अपने घर पर ही बेहद आसान विधि से तैयार कर सकते हैं।
​यह हवा में मौजूद नाइट्रोजन को सोखकर सीधे धान के पौधों तक पहुँचाता है, जिससे खेत में 15 से 25 प्रतिशत तक यूरिया की सीधी बचत होती है। इसके इस्तेमाल से न सिर्फ रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होगी, बल्कि लगातार खराब हो रही मिट्टी की गुणवत्ता (उर्वरता) भी वापस लौट आएगी।
​तरल उर्वरक भी बड़ा विकल्प: 90% तक होती है नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपयोग दक्षता
​जागरूकता अभियान के तहत कृषि अधिकारी किसानों को पारंपरिक दानेदार खादों की जगह आधुनिक लिक्विड (तरल) उर्वरकों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि जहाँ पारंपरिक दानेदार खादों की उपयोग दक्षता (पौधों द्वारा ग्रहण करने की क्षमता) मात्र 50 प्रतिशत होती है (यानी आधा खाद मिट्टी और हवा में बर्बाद हो जाता है), वहीं इसके विपरीत नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपयोग दक्षता 80 से 90 प्रतिशत तक होती है। यह तरल खाद सीधे पौधों की पत्तियों के माध्यम से अवशोषित होती है, जिससे फसल को तुरंत और पूरा पोषण मिलता है। यह न केवल बाजार में मिलने वाली बोरियों से काफी सस्ता है, बल्कि इसे ढोना और खेतों में छिड़काव करना भी बेहद आसान है।
​घर पर ऐसे तैयार करें ‘नील हरित शैवाल’ का टैंक
​ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा गांवों में चौपाल लगाकर किसानों को घर पर ही शैवाल कल्चर तैयार करने की कड़क ट्रेनिंग दी जा रही है:
​टैंक का निर्माण: ऐसी जगह जहाँ सीधी धूप आती हो, वहाँ ईंटों से 1 मीटर चौड़ा और अपनी सुविधा अनुसार लंबा टैंक बनाकर उस पर प्लास्टिक (त्रिपाल) बिछा दें।
​पानी और चूना: टैंक में 6 इंच पानी भरकर उसमें 200-250 ग्राम बुझा हुआ चूना मिलाएं, ताकि पानी का पीएच (pH) मान संतुलित हो सके।
​मिट्टी और पोषक तत्व: इसके बाद 10-15 किलो उपजाऊ कन्हार मिट्टी और प्रकाश संश्लेषण बढ़ाने के लिए 500 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट का छिड़काव करें।
​कल्चर का छिड़काव: अंत में 150-200 ग्राम नील हरित शैवाल का मूल कल्चर पानी में डाल दें। मात्र 7 से 10 दिनों में पानी के ऊपर हरी परत जम जाएगी, जिसे सुखाकर किसान अपने पास रख सकते हैं।
​हरी खाद पर भी मिल रहा है 50% अनुदान
​कृषि विभाग चारामा ने किसानों से अपील की है कि यूरिया की कमी और जमीनों को बंजर होने से बचाने के लिए इस एक महीने के भीतर ढेंचा और मूंग जैसी हरी खाद की बुवाई अवश्य कर लें। विभाग द्वारा इसके बीजों पर 50 प्रतिशत की भारी सब्सिडी (अनुदान) दी जा रही है। फसल लगाने के 45-50 दिन बाद इसे रोटावेटर से मिट्टी में पलट देने से जमीन को भरपूर जैविक कार्बन मिलता है, जिससे अनाज में असली पोषक तत्व लौटते हैं।
​तकनीकी मार्गदर्शन के लिए कृषि विभाग की खुली अपील
​कृषि विभाग चारामा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने क्षेत्र के समस्त ग्रामीणों और किसान भाइयों से विशेष अपील की है कि नील हरित शैवाल (BGA) बनाने की विधि, नैनो यूरिया/डीएपी के सही इस्तेमाल, कल्चर की उपलब्धता या जैविक खेती से जुड़ी किसी भी प्रकार की विस्तृत जानकारी के लिए वे सीधे अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) या विकासखंड स्तरीय कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। विभाग की टीम हर ग्राम पंचायत में किसानों को ऑन-फील्ड (खेत पर) तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। बाजार के महंगे खादों के चक्कर में न पड़ें, सही जानकारी अपनाएं और अपनी लागत घटाएं।

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