एम्बुलेंस नहीं पहुँची, 80 वर्षीय बुजुर्ग को बाइक पर अस्पताल लाने को मजबूर परिजन

स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल, सरकारी सिस्टम की लापरवाही से लोगों में आक्रोश

भानुप्रतापपुर। नगर और ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में प्रसूता महिला और नवजात की मौत के बाद सरकारी एवं निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली चर्चा में बनी हुई थी, वहीं अब एम्बुलेंस सेवा की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है।
जानकारी के अनुसार आसुलखर क्षेत्र के निवासी रमेश नरेटी अपने 80 वर्षीय बुजुर्ग पिता सूरज लाल नरेटी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस सेवा को फोन किया। परिजनों का आरोप है कि एम्बुलेंस कर्मी ने “ठीक है, पहुँच रहे हैं” कहकर फोन काट दिया, लेकिन काफी देर इंतजार के बावजूद एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुँची।
इधर बुजुर्ग की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। मजबूरी में बेटे रमेश नरेटी ने पड़ोसियों की मदद ली और अपने वृद्ध पिता को मोटरसाइकिल पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाया।
रमेश नरेटी ने बताया कि यदि समय पर एम्बुलेंस पहुंच जाती तो उनके पिता को इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन सेवा सिर्फ कागजों में चल रही है।
इस घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जब आपात स्थिति में एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सेवा समय पर उपलब्ध नहीं होगी, तो आम जनता आखिर किस पर भरोसा करे।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले डिलीवरी के दौरान महिला एवं नवजात की मौत के मामले ने भी स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया था। लगातार सामने आ रही घटनाओं से यह साफ नजर आ रहा है कि भानुप्रतापपुर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं? आखिर मरीजों और उनके परिजनों को कब तक इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा?

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