सीमांकन, नामांतरण, नजूल पट्टा नवीनीकरण के बढ़ रहे मामले
राजकुमार मल
भाटापारा- तय नहीं सीमांकन कब होगा ? ‘रसूख’ और ‘अर्थ’ है तभी नजूल पट्टा का नवीनीकरण हो पाएगा। दर्जनों मामले पेंडिंग हैं नामांतरण और फौती के लेकिन चुस्ती केवल ऐसे ही मामलों में नजर आती है जहां ‘गुंजाइश’ पक्की होती है।
सुशासन का ढिंढोरा तो पीट रही है सरकार लेकिन पेंडिंग मामलों को लेकर ना तो सरकार गंभीर है, ना उच्च अधिकारी। ऐसे में मैदानी अमला मनमर्जी से काम कर रहा है और भटक रहे हैं जरूरतमंद नागरिक, अपनी समस्याओं के समाधान के लिए।
चाहिए तीन, है सिर्फ एक
जिले का सबसे बड़ा राजस्व क्षेत्र। इसे ध्यान में रखते हुए तीन राजस्व निरीक्षकों की तैनाती की व्यवस्था है लेकिन महज एक राजस्व निरीक्षक की ही व्यवस्था कर पाया है जिला प्रशासन। जरूरतमंदों की पीड़ा तब और बढ़ती है, जब इस एकमात्र उपलब्ध राजस्व निरीक्षक से भी सहयोग नहीं मिलता। शिकायतें, या जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचने पर भी काम हो जाने की पूरी गारंटी नहीं है। इसलिए तारीख पर तारीख जैसी व्यवस्था स्वीकार कर ली जा रही है।
यहां मेरी मर्जी
नजूल शाखा। सबसे ज्यादा आमदरफ्त वाला विभाग। सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है। पेंडिंग मामले सैंकड़ों की संख्या में इसलिए हैं क्योंकि रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने की जानकारी खुद विभाग ही देता है। नया पट्टा और पुराने पट्टे के नवीनीकरण के ऐसे ही मामलों में सक्रियता नजर आती है जो ‘अर्थ’ या ‘पहुंच’ से संबंध रखते हैं। ‘मध्यस्थ’ की भूमिका निभाने वाले ‘बाहर और भीतर’ दोनों जगह आसानी से मिल जाएंगे।
जानकर भी अनजान
सुशासन के दावे करने वाला सत्ता पक्ष और कुशासन को लेकर आवाज उठाने वाला विपक्ष। इन दोनों ने इस मामले को लेकर जैसा मौन साधा हुआ है, उसकी जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम होगी। इस अव्यवस्था के लिए वह जिला प्रशासन भी बराबर का जिम्मेदार है, जिस पर निरंतर निगरानी और व्यवस्था बहाली का जिम्मा है लेकिन जानकर भी अनजान बना हुआ है जिला प्रशासन। इसलिए अर्थ और समय बर्बाद करने के लिए विवश हैं जरूरतमंद।