रेड गोल्ड पर तस्करों की नजर, बैलाडीला से महाराष्ट्र तक फैला नेटवर्क, अवैध खनन से करोड़ों रुपये का नुकसान




दंतेवाड़ा। बैलाडीला की पहाड़ियों से लौह अयस्क तस्करी का मामला सामने आने के बाद रोज नए खुलासे हो है। तस्करों ने अब अवैध खनन और परिवहन का नया नेटवर्क तैयार कर लिया है, जिसके जरिए उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क सीधे महाराष्ट्र भेजा जा रहा है। इस अवैध कारोबार में जगदलपुर-बचेली नेटवर्क सक्रिय है। चोरी के अयस्क का सौदा करीब 6000 रुपए प्रति टन में किया जा रहा है।


जानकारी के मुताबिक तस्करों ने इस बार नया तरीका अपनाया है, जिन खदानों की नीलामी हो चुकी है और अभी आधिकारिक खनन शुरू नहीं हुआ है। वहां पहले से मौजूद लौह अयस्क को चोरी-छिपे निकाला जा रहा है। रिजर्व फॉरेस्ट और डिपॉजिट क्षेत्रों से अयस्क निकालकर निजी जमीनों पर अस्थायी डंपिंग यार्ड बनाए गए हैं, जहां से रात के समय ट्रकों के जरिए माल बाहर भेजा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों से जंगल क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। देर रात ट्रकों में लौह अयस्क भरकर रायपुर होते हुए महाराष्ट्र भेजा जा रहा है। इसके बावजूद वन विभाग और खनिज विभाग की ओर से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे विभागीय निगरानी और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


बताया जा रहा है कि बैलाडीला क्षेत्र का हाई क्वालिटी लौह अयस्क बाजार में काफी महंगा बिकता है। यही वजह है कि तस्कर संगठित गिरोह बनाकर इस खेल को अंजाम दे रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि हर सप्ताह सैकड़ों टन अयस्क बाहर भेजा जा रहा है, जिससे शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो सकता है। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। कुछ संदिग्ध डंपिंग यार्ड और परिवहन मार्गों की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और स्थानीय नेटवर्क पर कार्रवाई हो सकती है।


इस मामले में एसडीओ ने कहा कि अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें विभाग को मिली हैं। संबंधित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों की जांच कराई जा रही है। यदि किसी भी व्यक्ति या गिरोह की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ वन अधिनियम और खनिज नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। लौह अयस्क तस्करी मामले में फाइल रेंज स्तर से एसडीओ कार्यालय आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

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