कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी से निकाले गए नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि टीएमसी के 50 से अधिक विधायक खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताने की तैयारी में हैं। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
रिजू दत्ता ने दावा किया कि विधायक जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी ताकत दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके साथ दो-तिहाई बहुमत के करीब विधायक हैं और वे खुद को पार्टी का वास्तविक गुट मानते हैं। साथ ही उन्होंने विपक्ष के नेता के पद को लेकर भी नया दावा पेश किया है।
क्या हैं बागी गुट की प्रमुख मांगें?
रिजू दत्ता के अनुसार, बागी गुट विधानसभा अध्यक्ष के सामने तीन प्रमुख मांगें रख सकता है। पहली, उनके पास बहुमत का समर्थन है और वही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। दूसरी, विपक्ष के नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी को मान्यता दी जाए। तीसरी, यदि दो-तिहाई बहुमत साबित होता है तो पार्टी का चुनाव चिह्न भी उसी गुट को दिया जाए।
हालांकि राजनीतिक समीकरणों के अनुसार टीएमसी के कुल 80 विधायक हैं। किसी नए गुट को आधिकारिक मान्यता पाने के लिए कम से कम 54 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा। फिलहाल रिजू दत्ता स्वयं विधायक नहीं हैं, जिससे उनके दावों पर सवाल भी उठ रहे हैं।
निलंबित विधायकों की बैठक से बढ़ी चर्चा
सोमवार को पार्टी से निलंबित किए गए विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने विधायक हॉस्टल में कई विधायकों के साथ बैठक की। सूत्रों के मुताबिक बैठक में पार्टी के कुछ प्रभावशाली और वरिष्ठ विधायक भी शामिल हुए।
दोनों नेताओं का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए प्रस्ताव में उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। इसी मामले पर आपत्ति जताने के बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया।
बंगाल की राजनीति पर नजर
टीएमसी में संभावित टूट की अटकलों के बीच अब सभी की नजर विधानसभा अध्यक्ष और पार्टी नेतृत्व की अगली रणनीति पर है। यदि बागी गुट अपने दावे के मुताबिक पर्याप्त समर्थन जुटा लेता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।