प्रफुल्ल पारे
रायपुर। सुशासन तिहार के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करते हुए चालीस से अधिक आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी हैं। इस फेरबदल में सात जिलों के कलेक्टर बदले गए और कुछ अधिकारी जो लूप लाइन में थे उन्हें जिलों में कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। इस फेबदल में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने सचिव बसवराजू को मुख्यमंत्री सचिवालय से बाहर का रास्ता दिखाया है और 2005 बैच के शक्तिशाली समझे जाने वाले मुख्यमंत्री के सचिव से वित्त विभाग वापस ले लिया है। इस फेरबदल में सरकार की मंशा साफ़ दिखाई दे रही है कि जो परफॉर्म करेगा उसे अवसर दिए जायेंगे। इसके चलते 2002 बैच के डॉक्टर रोहित यादव को ऊर्जा के साथ वित्त विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। वहीं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह ऊर्जा विभाग की सभी कंपनियों का काम देखेंगे।
इस फेरबदल में मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों की मांग का भी ध्यान रख है। कुछ मंत्री अपने विभाग के सचिव से नाराज चल रहे थे और लगातार उन्हें हटाने की मांग भी कर रहे थे। इस क्रम में पहला नाम कृषि मंत्री रामविचार नेताम का है जिनकी अपनी सचिव शहला निगार के साथ पटरी नहीं बैठ रही थी। इसी वजह से शहला निगार को महिला एवं बाल विकास विभाग में भेजा गया और उनकी जगह पर सिद्धार्थ कोमल परदेशी को सचिव कृषि और कृषि उत्पादन आयुक्त बनाया गया। इस फेरबदल में वो अधिकारी भी शामिल हैं जिनकी शिकायतें लगातार मुख्यमंत्री को मिल रही थी। इसमें क्रेडा के सीईओ राजेश सिंह राणा भी हैं जिन्हे ग्रामोद्योग में भेजा गया और उनकी जगह सारांश मित्तर को क्रेडा का सीईओ बनाया गया। एनएचएम केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है और इस मिशन के संचालक रणवीर शर्मा से मुख्यमंत्री खुश नहीं थे इसलिए यह जिम्मेदारी 2012 बैच के अधिकारी संजीव झा को दी गई। इसी क्रम में एक नाम 2002 बैच के डॉक्टर कमलप्रीत सिंह का है उनसे लोक निर्माण विभाग लेकर उन्हें स्कूल शिक्षा सचिव बनाया गया है। कुछ ऐसे भी अधिकारी थे जिन पर अधिक कार्यभार था जिसे कम किया गया। रायपुर कमिशनर महादेव कावरे को सहकारिता आयुक्त और पंजीयक का दायित्व देकर सीआर प्रसन्ना का भार कम किया गया। 2015 बैच के आईएएस प्रभात मालिक पर भरोसा जताते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय में उनकी एंट्री की गई है। मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव रहते हुए मलिक संचालक उद्योग और विमानन का काम देखेंगे। कुछ महीने पहले मेडिकल प्रकरण में चर्चित रहीं पद्मिनी भोई को भी रजिस्ट्रार फार्म सोसायटी से निकालकर सारंगढ़ का कलेक्टर बनाया गया है। कुल मिलाकर यह बड़ा फेरबदल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इरादों को दर्शा रहा है कि वे किसी दबाव में कोई काम नहीं करेंगे और लापरवाही भी सहन नहीं करेंगे।