रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों पारा चढ़ा हुआ है। भाजपा की नई कोर कमेटी के गठन के बाद से ही बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। दरअसल, हाल ही में हुई भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, मंत्री रामविचार नेताम और गौरीशंकर अग्रवाल जैसे कद्दावर नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इस फैसले ने कांग्रेस को बैठे-बिठाए हमला करने का मौका दे दिया है।
पीसीसी चीफ का बड़ा आरोप: “गुटबाजी चरम पर”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) दीपक बैज ने इस मुद्दे पर भाजपा को जमकर घेरा। बैज ने कहा कि भाजपा के भीतर गुटबाजी अब खुलकर सामने आ गई है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पार्टी बृजमोहन अग्रवाल जैसे वरिष्ठ नेता के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ कर रही है। बैज के मुताबिक, एक अनुभवी नेता को इस तरह नजरअंदाज करना बताता है कि भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है।
बृजमोहन अग्रवाल का जवाब: “मुझे कोई किनारे नहीं कर सकता”
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी तीखा पलटवार किया। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि कोर कमेटी में बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है। वह पिछले 10 सालों से इसका हिस्सा रहे हैं। अग्रवाल ने तंज कसते हुए कहा, “जब तक मैं सक्रिय हूं, तब तक मुझे कोई राजनीति में किनारे नहीं कर सकता।” उन्होंने दीपक बैज को सलाह दी कि कांग्रेस दूसरों के घर में झांकने के बजाय पहले अपने संगठन की चिंता करे।
खर्च में कटौती पर भी छिड़ी जंग
बात सिर्फ कोर कमेटी तक नहीं रुकी। वित्त मंत्री ओपी चौधरी के काफिले और सरकारी गाड़ियों के पेट्रोल-डीजल में कटौती वाले बयान पर भी दीपक बैज ने हमला बोला। बैज ने इसे ‘शर्मनाक और दुर्भाग्यजनक’ करार दिया। उन्होंने सवाल किया कि अगर प्रदेश में आर्थिक संकट नहीं है, तो अब सरकार लीपापोती क्यों कर रही है? उन्होंने मांग की कि सरकार को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।
नतीजा: चुनावी मोड में पार्टियां
रायपुर के सियासी गलियारों में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि क्या भाजपा वास्तव में नई पीढ़ी को आगे लाकर पुराने दिग्गजों को विश्राम दे रही है? वहीं, कांग्रेस इस मौके को भुनाकर खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश में है। आने वाले दिनों में यह खींचतान और बढ़ने के आसार हैं।