अवकाश दिवस पर बोन्दा स्कूली बच्चों को बिना सुरक्षा के सड़क व कड़ी धूप में नचवाने का मामला, जांच का आदेश

अवसर था एक शिक्षक का विदाई समारोह 0
0 शिक्षा विभाग की एक और करतूत आई सामने 0
दिलीप गुप्ता
सरायपाली =हमेशा अपने कारनामों में सुर्खियों में रहने वाला शिक्षा विभाग अब फिर एक कारनामे के कारण सुर्खियों में आ गया है । पूर्व में भी यह विभाग अपने कार्यों व भ्रष्टाचार के लिए बदनाम हो चुका है । वर्तमान में अवकाश के दिन एक शिक्षक के बिदाई समारोह में नियम विरुद्व कार्य करते हुवे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों व शासन के निर्देशों को धता बताते हुवे शाही अंदाज में सड़क में चिलचिलाती धूप में जुलूस निकाला गया । शिकायत पर डीईओ द्वारा जांच का आदेश दिया गया है । जांच का आदेश तो दे दिया गया है पर परिणाम वैसा ही आयेगा जैसा अब तक आया है । जांच के नाम पर लीपा पोती की संभावना अधिक दिखाई देती है ।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार माननीय सुप्रीम कोर्ट , हाई कोर्ट तथा शासन-प्रशासन द्वारा किसी भी कार्यक्रमों में स्कूली नाबालिग बच्चों के साथ क्रूरता न हो बच्चों का दुरूपयोग न हो इसके लिए इसके लिए कठोर नियम हैं । लेकिन नियमों को मानता कौन है । अपने निजी स्वार्थ व प्रचार के लिए ऐसे नियम कायदे को किनारे कर कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे है । ऐसा ही एक मामला सरायपाली से लगे ग्राम बोदा स्थित शासकीय उच्च प्राथमिक शाला बोन्दा में घटित हुआ है।
विगत 03/04/2026 को गुड फ्राइडे के अवसर पर स्कूलों में शासकीय अवकाश था, इस दिन एक वर्ष पूर्व 30/6/2025 को सेवानिवृत्त हुवे शिक्षक भोजराज पटेल का विदाई समारोह कार्यक्रम रखा गया था । उन्हें एक शैक्षणिक वर्ष के लिए एक्सटेंशन मिल हुआ था । जहां उनका एक्सटेंशन 31/3/26 को समाप्त हुआ । यह विदाई समारोह औपचारिकतावश स्कूल परिसर में शालीनता से मनाया जा सकता था किंतु ऐसा न कर अध्ययनरत स्कूली बच्चों को गणवेश में आने का मौखिक आदेश दें दिया गया। स्कूल से महाराजा की तरह वाहन में बैठकर फूल मालाओं से लदे सेवानिवृत्त शिक्षक का बाकायदा बेड बाजों के साथ गणवेश धारी स्कूली बच्चों को चिलचिलाती कड़ी धूप में बिना सुरक्षा के बीच सड़क में नचवाया गया।
महत्वपूर्ण यह है कि जिस बीच सड़क में नाबालिग स्कूली बच्चों को नचवाया जा रहा था, वह सड़क सरायपाली-सारंगढ़ रोड़ जिसमें भारी वाहनों का आवागमन हमेशा होता है।
इस स्कूल की प्रधान पाठिका पदमिनी कुमार को अवकाश के दिन यह कार्यक्रम करने क्यों दिया गया ?.इसके लिए क्या समिति व बीईओ को सूचित के अनुमति ली गई । स्कूली बच्चों को गणवेश में आने के लिए बाध्य क्यों किया गया ? स्कूल का चाबी दूसरों को क्यों दी गई ? जैसे प्रश्नों का उत्तर जानने जब प्रधान पाठिका पद्मिनी कुमार को फोन किया गया तो उन्होंने फोन काट दिया । सवाल यहां यह भी है कि दुर्भाग्य से यदि किसी नाबालिक स्कूली बच्चे का सड़क दुर्घटना हो जाती तो इस घटना की जिम्मेदार कौन होता ? छठवां छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) अधिनियम 1965 के अनुसार सेवानिवृत्त सेवक को विदाई समारोह कार्यक्रम शालीनता पूर्वक किया जाना है, स्कूली बच्चों को सड़क में बिना सुरक्षा से सिलसिलाते कड़ी धूप पर नचवाना नियमों का घोर उल्लंघन है।
इन सभी की शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी आदेश क्रमांक./2555/सतर्कता/जांच/2026 जारी आदेश महासमुंद दिनांक 21/04/2026 कों जारी कर जितेन्द्र कुमार बुडेक प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिछिया विकासखंड बसना को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब देखना है यह दिलचस्प होगा की जांच में कौन सा तथ्य सामने आता है और किन-किन शासकीय सेवकों के ऊपर कार्यवाही की गाज गिरती है या पूर्व की तरह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जायेगा ।

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