साध्वी राधिका किशोरी ने कहा- ‘श्रद्धा और विश्वास से लिया नारायण नाम गंगा स्नान के समान’

पिथौरा।
ग्राम लेलेसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। व्यासपीठ से विराजमान साध्वी राधिका किशोरी ने अपने प्रेरक प्रवचनों में संगति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में संगति का विशेष प्रभाव पड़ता है। अच्छी संगति से जहां सद्गुणों का विकास होता है, वहीं बुरी संगति व्यक्ति को पतन की ओर ले जाती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सत्संग अपनाकर दुर्गुणों का त्याग करना चाहिए।
साध्वी ने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ “नारायण” नाम का स्मरण करता है, उसे गंगा स्नान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान के नाम का स्मरण मनुष्य के समस्त पापों का नाश कर उसे भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
कथा के दौरान उन्होंने जड़भरत प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि सच्ची भक्ति बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि मन की शुद्धता और वैराग्य से प्राप्त होती है। इसके पश्चात अजामिल की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि अंत समय में भी भगवान का नाम स्मरण करने से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।
भक्त प्रह्लाद की कथा का उल्लेख करते हुए साध्वी जी ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान के प्रति अटूट विश्वास रखना चाहिए। प्रह्लाद की निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर उनकी रक्षा की और अधर्म का नाश किया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के सामने अहंकार टिक नहीं सकता।
उन्होंने कहा कि भगवान को पाने के लिए कठोर तपस्या की नहीं, बल्कि सच्चे मन से की गई भक्ति की आवश्यकता होती है। सच्चे भाव से की गई प्रार्थना भगवान को भी भक्त की सहायता के लिए बाध्य कर देती है।
कथा श्रवण हेतु बागबाहरा, पिथौरा, महासमुंद, बसना, बिलाईगढ़, सराईपाली सहित छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का माहौल बना हुआ है। रविवार को कथा का विश्राम दिवस रहेगा।

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