आज के डिजिटल युग में जितनी तेजी से सुविधाएं बढ़ी हैं, उतनी ही तेजी से वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud) के मामले भी सामने आ रहे हैं। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां लोगों को तब पता चलता है कि उनके नाम पर लाखों का कर्ज है, जब वे अपना सिबिल (CIBIL) स्कोर चेक करते हैं। बिना किसी आवेदन या पैसे मिले ही लोग कर्जदार बन रहे हैं।
ठग डिजिटल लेंडिंग और इंस्टेंट लोन ऐप्स के कमजोर वेरिफिकेशन सिस्टम का फायदा उठाकर मासूम लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसका सीधा असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है और भविष्य में असली जरूरत पड़ने पर आपको बैंक से लोन नहीं मिल पाता।
कैसे बुना जाता है धोखाधड़ी का जाल?
ठग केवल आपके पैन (PAN) नंबर से ही फ्रॉड नहीं करते, बल्कि वे आपकी पूरी डिजिटल प्रोफाइल तैयार करते हैं।
डेटा लीक और फिशिंग: आपकी जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और अन्य निजी जानकारियां डेटा लीक या फर्जी मोबाइल ऐप्स के जरिए चुराई जाती हैं।
फर्जी KYC: चुराई गई जानकारियों का इस्तेमाल कर डिजिटल केवाईसी (KYC) पूरी की जाती है। कई बार तो एआई (AI) की मदद से नकली फोटो या वीडियो बनाकर वेरिफिकेशन सिस्टम को भी चकमा दे दिया जाता है।
पैसा गायब: जैसे ही लोन मंजूर होता है, ठग तुरंत उसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते हैं और पीड़ित के नाम पर सिर्फ कर्ज का बोझ रह जाता है।
ऐसे करें अपनी सुरक्षा (बचाव के तरीके)
नियमित चेक करें क्रेडिट रिपोर्ट: समय-समय पर CIBIL, Experian या Equifax जैसी वेबसाइट पर जाकर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते रहें। यदि कोई अनजान लोन दिखे, तो समझ जाएं कि कुछ गड़बड़ है।
KYC साझा करने में सावधानी: अपना पैन कार्ड और आधार डिटेल्स हर किसी के साथ साझा न करें। जहां जरूरत हो, वहां ‘मास्क्ड आधार’ (Masked Aadhaar) का उपयोग करें।
संदिग्ध लिंक से बचें: किसी भी अनजान ईमेल या मैसेज में दिए गए फिशिंग लिंक पर क्लिक न करें।
अगर आप शिकार हो जाएं तो क्या करें?
लेंडर से संपर्क: सबसे पहले उस बैंक या संस्था को सूचित करें जहां से लोन लिया गया है और फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर क्राइम रिपोर्ट: तुरंत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करें या 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
पुलिस में FIR: नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में जाकर लिखित शिकायत दें।
क्रेडिट ब्यूरो को सूचना: क्रेडिट ब्यूरो को सूचित करें ताकि वे उस लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ के रूप में मार्क कर सकें और आपका क्रेडिट स्कोर ठीक हो सके।
डिजिटल दौर में ‘सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव’ है। पहले 24 घंटों में की गई कार्रवाई आपके नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती है।