नीरज चोपड़ा का बड़ा कबूलनामा; चोट के बावजूद विश्व चैंपियनशिप में खेलना गलत फैसला था, अब दोहा डायमंड लीग से करेंगे वापसी

भारतीय खेल प्रेमियों और स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा के फैंस के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर आ रही है। भारत के गोल्डन बॉय और स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने अपनी चोट को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने खुद यह बात स्वीकार की है कि पिछले साल कमर की चोट से जूझने के बावजूद विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेना उनका एक गलत फैसला था। हालांकि खेल प्रेमियों के लिए राहत की बात यह है कि नीरज अब पूरी तरह से फिट महसूस कर रहे हैं। वे शुक्रवार को होने वाली मशहूर दोहा डायमंड लीग के जरिए अपने नए सत्र यानी सीजन की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

चोट के कारण टोक्यो में आठवें नंबर पर खिसक गए थे नीरज

आपको याद दिला दें कि सितंबर 2025 में हुई टोक्यो विश्व चैंपियनशिप में नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। वे वहां केवल 84.03 मीटर का थ्रो ही फेंक पाए थे और आठवें स्थान पर रहे थे। इस बड़ी प्रतियोगिता के खत्म होने के बाद नीरज ने बताया था कि वे कमर के निचले हिस्से की गंभीर चोट (Lower Back Injury) से परेशान थे। इसी पुरानी चोट के कारण उन्हें इस साल के नए सीजन (New Season) की शुरुआत करने में भी काफी देर हो गई।

चोट थी पर साल का आखिरी मैच समझकर लिया था रिस्क

दोहा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नीरज चोपड़ा ने अपना दर्द साझा किया। उन्होंने कहा कि विश्व चैंपियनशिप से ठीक पहले ही उन्हें यह चोट लग गई थी। उनकी टीम ने चोट को ठीक करने के लिए बहुत मेहनत की और वे टोक्यो में मैदान पर भी उतरे। लेकिन अब पीछे मुड़कर देखने पर लगता है कि वह फैसला सही नहीं था। नीरज ने बताया कि उन्हें पहले से मालूम था कि शरीर में समस्या है, लेकिन वह साल 2025 की आखिरी बड़ी प्रतियोगिता थी, इसलिए उन्होंने रिस्क यानी जोखिम उठाने का मन बनाया। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी के जीवन में चोटें आती रहती हैं, कभी टखने तो कभी कंधे में दिक्कत होती है। अब उन्होंने अपने फिजियो यानी शरीर की कसरत कराने वाले डॉक्टर के साथ मिलकर फिटनेस पर काम किया है।

इसी दोहा के मैदान पर पार की थी 90 मीटर की जादुई बाधा

नीरज चोपड़ा के लिए दोहा का यह मैदान हमेशा से बेहद खास रहा है। इसी मैदान पर पिछले साल 16 मई 2025 को नीरज ने 90.23 मीटर का भाला फेंककर पहली बार अपने करियर में 90 मीटर की जादुई बाधा को पार किया था। हालांकि खुद नीरज का मानना है कि तकनीकी रूप से (Technically) वह उनका सबसे बेस्ट थ्रो नहीं था। उन्होंने बताया कि उस समय उनके हाथ की रफ्तार तो बहुत शानदार थी, लेकिन अगर वे अपने शरीर के निचले हिस्से का ताकत के साथ सही इस्तेमाल करते, तो भाला दो-तीन मीटर और आगे जा सकता था। बहरहाल, अब सभी की नजरें कल होने वाले उनके मुकाबले पर टिकी हैं।

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