चारामा: जिले के पूर्व आदिवासी समाज जिलाध्यक्ष स्वर्गीय जीवन ठाकुर की जेल अभिरक्षा में हुई मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब उनके 23 वर्षीय बेटे नीरज ठाकुर की मौत ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया है। 12 जनवरी को रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में इलाज के दौरान नीरज ने दम तोड़ दिया। इस घटना के विरोध में आदिवासी समाज और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाईवे पर ढाई घंटे तक चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप रहा।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि जीवन ठाकुर के साथ उनके बेटे नीरज ठाकुर भी जेल में बंद थे। 12 दिसंबर को जेल से रिहा होने के बाद से ही नीरज लगातार बीमार चल रहे थे और अचानक कोमा में चले गए थे। आदिवासी समाज और कांग्रेस का आरोप है कि जेल के भीतर पिता-पुत्र दोनों के साथ साजिश हुई है। समाज के नेताओं का कहना है कि नीरज ने जेल प्रबंधन द्वारा पैसों की मांग और पिता के साथ किए गए दुर्व्यवहार की पोल खोली थी, इसीलिए जेल से बाहर आने के बाद उनकी अचानक तबीयत बिगड़ना बड़े संदेह को जन्म देता है।
प्रशासन की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की मांग
चक्काजाम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर निम्नलिखित मांगें रखीं:
न्यायिक जांच: पूरे मामले की जांच सेवानिवृत्त जजों की टीम से उच्च स्तरीय तरीके से कराई जाए।
अधिकारियों पर कार्रवाई: प्रदर्शनकारियों की मांग पर प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से नायब तहसीलदार और थाना प्रभारी को हटाए जाने का आश्वासन दिया।
जांच में देरी पर सवाल: समाज के नेताओं ने नाराजगी जताई कि जीवन ठाकुर की मौत की जांच 7 दिनों में पूरी करने का वादा किया गया था, जो एक महीने बाद भी ठंडे बस्ते में है।
अनुविभागीय अधिकारी (SDM) और SDOP के आश्वासन के बाद ढाई घंटे बाद हाईवे से जाम हटाया गया। हालांकि, आदिवासी समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उच्च स्तरीय न्यायिक जांच शुरू नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा।