रमेश गुप्ता भिलाई। कुर्बानी के जज्बे के साथ मुस्लिम समुदाय 28 मई को ईद उल अजहा मनाएगा। ईद की नमाज के लिए शहर में ईदगाहों और मस्जिदों में खास इंतजाम किए गए हैं। वहीं मौसम बदलने और बारिश होने पर नमाज के लिए अलग बंदोबस्त रखा गया है। इसके साथ ही तीन दिन तक कुर्बानी का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। जिसमें लोग अपनी हैसियत के मुताबिक बकरों की कुर्बानी देंगे।
जामा मस्जिद सेक्टर-6 के ईदगाह मैदान में सुबह ठीक 8 बजे ईदुल अजहा की नमाज अदा की जाएगी। भिलाई नगर मस्जिद ट्रस्ट के सदर मिर्जा आसिम बेग ने बताया कि मौसम में बदलाव होने पर तमाम इंतजाम किए गए हैं। बारिश होने पर सुबह 7:30 बजे मस्जिद में पहली जमाअत होगी और उसके बाद जरूरत के मुताबिक आधे-आधे घंटे के अंतराल से जमाअत होगी।
शेर-ए-ख़ुदा ईदगाह मैदान, हाउसिंग बोर्ड में सुबह ठीक 8:00 बजे हजरत अल्लामा मौलाना ताज़िम रज़ा मिस्बाही नमाज अदा करवाएंगे। मौसम ख़राब होने की सूरत में ईद की नमाज़ शेर-ए-ख़ुदा मस्जिद, कैलाश नगर में अदा की जाएगी। शेर-ए-खुदा मस्जिद में पहली जमात सुबह ठीक 7:30 बजे और दूसरी जमात सुबह 8:30 बजे होगी। फरीद नगर ईदगाह में सुबह 7:30 बजे जमाअत होगी। मदनी मस्जिद जोन-1 में सुबह 8 बजे, हुसैनी मस्जिद करबला मैदान जीई रोड में सुबह 7:45 बजे जमाअत होगी। अशरफ़ी मस्जिद रूआबांधा भिलाई में पहली जमाअत सुबह 7 बजे इमाम कारी फारूक अशरफ़ी अदा करवाएंगे। वहीं जरूरत पड़ने पर दूसरी जमाअत 7:45 बजे मुफ़्ती मुहम्मद शाहिद अली मिस्बाही प्रिंसिपल मदरसा ताजुल उलूम रुआबांधा भिलाई या क़ारी शमशीर अली अशरफ़ी अदा करवाएंगे।
आलिमों ने कहा- इबादत करने और नेकी कमाने का बेहतरीन दिन है ईद उल अजहा
इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक जिलहिज्जा का महीना बेहद अहम है। इस मौके पर काजी ए शहर दारुल कजा भिलाई मुफ्ती मोहम्मद सोहेल ने कहा कि जिल हिज्जा के 10 दिन यानी एक से 10 तारीख तक गुनाहों से तौबा करने, अल्लाह की इबादत करने और नेकी कमाने के बेहतरीन दिन है। उन्होंने ने कहा कि 9 वें का रोज़ा अरफा का दिन कहा जाता है।
इसके बारे मे पैगम्बर हज़रत मोहम्मद सल्लु अलैहिस्सलाम ने कहा जिसका सार यह है कि इस दिन का रोज़ा रखने वाले के एक साल के गुनाह माफ़ हो जाते है। मौलाना सैय्यद फैसल अमीन कहते हैं कि यौमे अरफा के दिन सबसे पाक दिनों मे से एक है।
हाफिज अमान कहते हैं कि ईद उल अजहा कुर्बानी माफी का सबसे बड़ा त्यौहार है। इसमें अल्लाह के नबी हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम व हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी को क़यामत तक आने वाले ईमान वालों के लिए एक बड़ी तालीम है। उन्होंने कहा कि अल्लाह दिलों के भेद को भी जानता है तकवा परहेज़गार बनो उसके नजदीक तकवा (अल्लाह का डर) बड़ी कुबूलियत की चीज है।