नई दिल्ली। भारत के मंदिरों में लगी घंटियां सिर्फ आवाज करने का जरिया नहीं हैं। वे हमारे मन को शांत करती हैं और भगवान के प्रति हमारी आस्था को जगाती हैं। लेकिन देश में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जहां की घंटियां अपने आप बजने लगती हैं। कभी आधी रात को तो कभी पूजा के समय, इन घंटियों को बजने के लिए किसी इंसान के हाथ की जरूरत नहीं पड़ती। आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही 6 चमत्कारी मंदिरों के बारे में जहां यह अनोखी घटना होती है।

नागेश्वर मंदिर गुजरात
गुजरात के द्वारका में स्थित नागेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर अपनी अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ ही एक अनोखे रहस्य के लिए भी जाना जाता है। स्थानीय लोगों और भक्तों का मानना है कि कुछ विशेष रातों में यहां की घंटियां अपने आप बजने लगती हैं। कई लोग इसे भगवान शिव की मौजूदगी का संकेत मानते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि हवा के तेज दबाव के कारण ऐसा हो सकता है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह गहरी आस्था का विषय है।
महालक्ष्मी मंदिर कोल्हापुर
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर को एक बहुत ही पवित्र शक्तिपीठ माना जाता है। इस मंदिर में माता के दर्शन के लिए रोज हजारों लोग आते हैं। इस मंदिर की एक बड़ी विशेषता यह है कि त्योहारों और मुख्य पर्वों के दौरान यहां लगी कुछ घंटियां अचानक खुद-ब-खुद बजने लगती हैं। वहां के पुजारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह इस बात का प्रतीक है कि माता रानी भक्तों की प्रार्थना को खुद स्वीकार कर रही हैं।
कामाख्या मंदिर असम
असम का कामाख्या मंदिर अपनी तांत्रिक परंपराओं और चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में आने वाले कई यात्री बताते हैं कि उन्होंने यहां घंटियों को बिना किसी के छुए बजते हुए सुना है। विशेष रूप से अंबुबाची मेले के दिनों में यह घटना अधिक देखने को मिलती है। जानकर लोग इसे धरती के भीतर होने वाली प्राकृतिक हलचल या कंपन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन भक्तों के लिए यह देवी मां का एक साक्षात संदेश है।
जगन्नाथ पुरी उड़ीसा
उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर अपने कई अनसुलझे रहस्यों के लिए जाना जाता है। यहां की कई बातें विज्ञान की समझ से भी परे हैं। इन्हीं चमत्कारों में से एक है यहां की घंटियों का अचानक बज उठना। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, कई बार मुख्य पूजा या किसी बड़े अनुष्ठान से ठीक पहले घंटियां बिना किसी मानवीय प्रयास के बजने लगती हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह घंटियां हमेशा शुभ मुहूर्त के समय ही बजती हैं।
केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड
हिमालय की गोद में बसा केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे पवित्र धामों में से एक है। बर्फबारी और ठंडी वादियों के बीच स्थित इस मंदिर के बारे में भी पुजारियों द्वारा एक दिलचस्प बात बताई जाती है। उनका कहना है कि देर रात को या तेज तूफान के समय जब मंदिर के कपाट बंद होते हैं, तब भी अंदर से घंटियों की आवाज सुनाई देती है। कुछ लोग इसे पहाड़ों की तेज हवा का असर मानते हैं, तो कुछ लोगों का कहना है कि हवा से इस तरह की सुरीली और नियमबद्ध आवाज निकलना मुमकिन नहीं है।
चिंतपूर्णी मंदिर हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश का चिंतपूर्णी मंदिर माता चिंतपूर्णी को समर्पित है, जो भक्तों की सभी चिंताएं दूर करती हैं। इस मंदिर में भी आरती और प्रार्थना के समय कई बार घंटियां अपने आप हिलने और बजने लगती हैं। वहां के पुजारियों का मानना है कि मां अपने भक्तों को यह भरोसा दिलाती हैं कि उनकी कोई भी प्रार्थना बेकार नहीं जाएगी।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारियां लोक मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और विभिन्न माध्यमों पर आधारित हैं। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते हैं और पाठक इन जानकारियों को सामान्य सूचना के तौर पर ही लें।