रायपुर/बिलासपुर (25 मई 2026): मारवाही वनमंडल में हुए कथित गोबर खाद आपूर्ति घोटाले में एक नया मोड़ आ गया है। छत्तीसगढ़ वन लिपिकवर्गीय कर्मचारी संघ ने विभाग के उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। संघ का आरोप है कि विभाग के बड़े अफसरों को बचाने के लिए एक छोटे कर्मचारी (लिपिक) को ‘बली का बकरा’ बनाया गया है।
इस संबंध में संघ के प्रांताध्यक्ष श्री बीरेन्द्र नाग के नेतृत्व में आज प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) बिलासपुर को एक ज्ञापन सौंपकर नियम विरुद्ध किए गए निलंबन को तत्काल निरस्त करने और वास्तविक दोषी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
बिना स्पष्टीकरण के किया गया निलंबित
संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, मुख्य वन संरक्षक (CCF) बिलासपुर वृत्त द्वारा 22 मई 2026 को एक आदेश जारी कर मारवाही वनमंडल में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 श्री भूपेन्द्र साहू को निलंबित कर दिया गया था। संघ का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से आधारहीन और नियम विरुद्ध है, क्योंकि निलंबन से पहले कर्मचारी को कोई स्पष्टीकरण या ‘कारण बताओ नोटिस’ तक जारी नहीं किया गया।
विधानसभा में भी गूंज चुका है मामला
यह पूरा मामला जनवरी 2022 से दिसंबर 2025 के बीच हुए गोबर खाद आपूर्ति में वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। डोंगरगांव विधायक श्री दुलेश्वर साहू द्वारा विधानसभा के बजट सत्र 2026 में (प्रश्नोत्तरी क्रमांक 272) इस पर सवाल उठाया गया था। विभाग द्वारा विधानसभा के पटल पर दिए गए लिखित उत्तर में स्पष्ट रूप से तत्कालीन उप-वनमंडलाधिकारी (SDO) को ‘सत्यापनकर्ता’ और तत्कालीन वनमंडलाधिकारी (DFO) को ‘भुगतानकर्ता’ अधिकारी बताया गया था।
लिपिक पर आरोप हास्यास्पद क्यों?
वन लिपिक संघ ने जांच टीम की रिपोर्ट को पूरी तरह मनगढ़ंत और कूटरचित बताते हुए कई तकनीकी बिंदु सामने रखे हैं:
फील्ड सत्यापन का अधिकार नहीं: नियमानुसार किसी भी खरीदी या कार्य का भौतिक सत्यापन संबंधित उप-वनमंडलाधिकारी (SDO) द्वारा किया जाता है। किसी भी क्लर्क (लिपिक) को फील्ड वेरिफिकेशन का अधिकार ही नहीं होता।
चौकीदार से कराया गया लेखा संधारण: संयुक्त वन प्रबंधन समिति का लेखा संधारण समिति सचिव (वनरक्षक/वनपाल) को करना था, लेकिन मारवाही में यह काम एक वानिकी चौकीदार से कराया गया। ऐसे में लिपिक पर अवैध लेखा समायोजन का आरोप लगाना हास्यास्पद है।
गबन में भूमिका असंभव: राशि आहरण का प्रस्ताव समिति सचिव बनाता है और सत्यापन के बाद SDO व DFO की अनुमति से राशि आहरित होती है। इस पूरी प्रक्रिया में लिपिक की राशि गबन करने की कोई भूमिका ही नहीं हो सकती।
3 दिन का अल्टीमेटम, पूरे प्रदेश में ठप हो सकता है काम
छत्तीसगढ़ वन लिपिकवर्गीय कर्मचारी संघ ने विभाग को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी 3 दिनों के भीतर सहायक ग्रेड-02 भूपेन्द्र साहू का निलंबन वापस नहीं लिया गया और वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो संघ पूरे राज्य में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इस आंदोलन से होने वाली किसी भी शासकीय कार्य की असुविधा की संपूर्ण जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।
इस ज्ञापन की प्रतिलिपियां माननीय वन मंत्री, अपर मुख्य सचिव (ACS) और छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक श्री कमल वर्मा को भी आवश्यक सहयोग और कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं।
मारवाही वनमंडल भ्रष्टाचार मामला: क्लर्क को ‘बली का बकरा’ बनाने का आरोप, वन लिपिक संघ ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

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May