नीट में लीक या लूट?

कृष्ण कुमार सिकंदर

देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं में शामिल नीट (नीट) को लेकर पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह के विवाद सामने आए हैं, उन्होंने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है। हालिया घटनाक्रम में पेपर लीक के आरोपों के बीच कई ऐसे लोगों के नाम सामने आए जो परीक्षा प्रणाली से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे। शिक्षकों, बिचौलियों और प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया से जुड़े व्यक्तियों तक पर कार्रवाई हुई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि समस्या केवल अफवाहों या आशंकाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि परीक्षा की गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके थे।

ऐसे माहौल में जब सरकार और परीक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास बहाल करना था, तब यह खबर सामने आई कि भविष्य में प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक सेना के विमान के माध्यम से भेजने की व्यवस्था की जाएगी। पहली नजर में यह निर्णय सुरक्षा को मजबूत करने वाला कदम प्रतीत होता है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा सवाल छिपा है। यदि प्रश्नपत्रों को विमान से भेजने की जरूरत पड़ रही है तो क्या सरकार यह स्वीकार नहीं कर रही कि अब तक प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर थी? और यदि कमजोरी वितरण व्यवस्था में थी तो फिर यह मामला केवल “पेपर लीक” का नहीं बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की “लूट” का प्रतीक बन जाता है।

असल चिंता यह है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र केंद्र तक कैसे पहुंचा, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह गलत हाथों तक कैसे पहुंचा। यदि प्रश्नपत्र बनाने, छापने, सुरक्षित रखने या वितरण करने वाली व्यवस्था में बैठे लोग ही भ्रष्टाचार में शामिल हों तो केवल परिवहन का माध्यम बदल देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। सेना के विमान से प्रश्नपत्र भेजने से सुरक्षा की एक परत जरूर बढ़ सकती है, लेकिन इससे उन लोगों की जवाबदेही तय नहीं होती जिन्होंने परीक्षा की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया।

छात्रों को भरोसा दिलाने के लिए जरूरी था कि सरकार और एजेंसियां दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई का स्पष्ट संदेश देतीं। यह भी सुनिश्चित किया जाता कि जिन लोगों ने लीक हुए प्रश्नपत्रों का लाभ उठाया, उन्हें भी कानून के दायरे में लाया जाएगा। साथ ही परीक्षा प्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा कर उसकी कमजोर कड़ियों को सार्वजनिक किया जाता। इससे छात्रों को विश्वास मिलता कि वे जिस परीक्षा में बैठ रहे हैं, वह निष्पक्ष और पारदर्शी है।

आज लाखों छात्र वर्षों की मेहनत के बाद नीट जैसी परीक्षा में शामिल होते हैं। उनके लिए परीक्षा केवल एक टेस्ट नहीं बल्कि भविष्य का सवाल है। इसलिए सरकार की प्राथमिकता सुरक्षा के दिखावटी उपायों से अधिक व्यवस्था में मौजूद सेंधों को बंद करना होना चाहिए। प्रश्नपत्र सेना के विमान से भेजने का निर्णय भले ही प्रशासनिक रूप से प्रभावी लगे, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार, मिलीभगत और जवाबदेही की कमी दूर नहीं होगी, तब तक छात्रों का विश्वास पूरी तरह बहाल नहीं हो सकेगा। नीट को केवल सुरक्षित नहीं, बल्कि भरोसेमंद बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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