Korea Forest News : कोरिया: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सोनहट-देवगढ़ परिक्षेत्र में इन दिनों वनों की अवैध कटाई ने भयावह रूप ले लिया है। एक ओर सरकार जंगलों को बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जंगलों में अवैध कटाई का काला बाजार फल-फूल रहा है, लेकिन विभाग की चुप्पी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने आम जनता के भरोसे को तोड़ दिया है।
Korea Forest News : अवैध गतिविधियों का गढ़ बना देवगढ़ परिक्षेत्र
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, देवगढ़ परिक्षेत्र में लकड़ी तस्करी का खेल संगठित रूप से चल रहा है। घुघरा से लेकर कटगोड़ी तक के जंगलों से कीमती लकड़ियों को काटकर गायब किया जा रहा है। हर गुजरते मिनट के साथ प्राकृतिक संसाधन नष्ट हो रहे हैं, लेकिन सुरक्षा बल और वन विभाग की टीम इन्हें रोकने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। स्थानीय निवासी राजेश कुमार का कहना है कि, “हमने जंगलों की रक्षा के लिए शासन के वादों पर भरोसा किया था, लेकिन आज ज़मीनी हकीकत केवल शून्यता और बर्बादी है।”
अधिकारियों की नदारद मौजूदगी और लापरवाही
इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू अधिकारियों की अनुपस्थिति और कर्तव्य के प्रति लापरवाही है। आरोप है कि परिक्षेत्र अधिकारी, डिप्टी रेंजर और फॉरेस्ट गार्ड्स के दायित्व केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। धरातल पर उनकी सक्रियता शून्य है। स्थानीय ग्रामीण रंजन शर्मा ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि, “प्रत्येक अवैध घटना के पीछे पैसों का एक बड़ा जाल है। ड्यूटी के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है और जंगल को निजी लाभ के लिए तस्करों के हवाले कर दिया गया है।”
कागजों पर ड्रोन मॉनिटरिंग और संरक्षण अभियान
शासन ने वनों की रक्षा के लिए ड्रोन मॉनिटरिंग और बेहतर वन नीतियों का दावा किया है, लेकिन सोनहट-देवगढ़ परिक्षेत्र में ये दावे पूरी तरह खोखले नज़र आ रहे हैं। जंगलों की कटाई को लेकर बड़े पैमाने पर उठा-पटक के दृश्य सामने आ रहे हैं, फिर भी किसी सुरक्षा बल ने अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। सरकारी नीतियां अमल में आने के बजाय रद्दी की टोकरी में पड़ी दिखाई दे रही हैं।
उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
वनों के इस भारी नुकसान से जनमानस में गहरा आक्रोश है। लोगों को संदेह है कि विभाग की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर कटाई संभव नहीं है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि:
उच्च अधिकारियों द्वारा एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जाए।
कमिश्नर स्तर के आदेश जारी कर मामले की निष्पक्ष जांच हो।
दोषी कर्मचारियों और तस्करों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष: यदि समय रहते इन लापरवाह कर्मचारियों और नियमों की कमजोरियों को दूर नहीं किया गया, तो कोरिया के जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। जंगल हमारे जीवन का आधार हैं, और इनकी रक्षा करना केवल वन विभाग का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। क्या प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर ‘सत्य’ की बलि इसी तरह दी जाती रहेगी?