नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड मामले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी के सरेंडर पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिससे उनकी गिरफ्तारी का खतरा टल गया है। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्टे दे दिया है, जिसमें उन्हें सरेंडर करने के निर्देश दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से मांगा जवाब गुरुवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अमित जोगी को अभी आत्मसमर्पण करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई को नोटिस जारी कर उनका पक्ष रखने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई तक अमित जोगी को मिली यह राहत बरकरार रहेगी।
हाईकोर्ट ने दी थी उम्रकैद की सजा उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जग्गी हत्याकांड में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी समेत अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में अमित जोगी को 23 अप्रैल तक कोर्ट में सरेंडर करने की समय सीमा तय की थी। इस फैसले के खिलाफ जोगी ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर सजा पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अमित जोगी को कानूनी लड़ाई के लिए और वक्त मिल गया है। इस आदेश का मतलब यह है कि उन्हें फिलहाल जेल नहीं जाना होगा। चूंकि यह मामला राज्य की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का केंद्र रहा है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा रुख को अमित जोगी के लिए एक बड़ी संजीवनी के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें सीबीआई के जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी हैं।