नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण दुनिया भर में पैदा हुए तेल संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से कच्चे तेल की एक बड़ी खेप इस महीने भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग एक साल के अंतराल के बाद वेनेजुएला से करीब 10 से 12 मिलियन बैरल कच्चा तेल भारत आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं, ऐसे में वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति बहाल होना भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
जानकारों का मानना है कि वेनेजुएला भारत के लिए तेल का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री रास्तों में तनाव की स्थिति में यह आपूर्ति भारत में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में मददगार होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस खेप का कुछ हिस्सा कोच्चि बंदरगाह पर उतारा जा सकता है, जहां बीपीसीएल की रिफाइनरी स्थित है।
भारत वर्तमान में रूस और ईरान से भी कच्चे तेल की खरीद कर रहा है। इसके साथ ही अफ्रीकी देश अंगोला से भी तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। गौरतलब है कि वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार मौजूद है। हालांकि यहां का तेल हैवी क्रूड की श्रेणी में आता है और इसे रिफाइन करना थोड़ा महंगा होता है, लेकिन इसकी प्रचुर उपलब्धता इसे लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम बनाती है। भारत की यह पहल वैश्विक युद्ध के आर्थिक प्रभावों को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।