संकट में फंसी एयरलाइंस के लिए 4000 करोड़ का सरकारी पैकेज

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव और आसमान छूती ईंधन की कीमतों के बीच केंद्र सरकार भारतीय एयरलाइंस कंपनियों के बचाव में उतर आई है। सरकार ने संकट से जूझ रही विमानन कंपनियों के लिए 4,000 करोड़ रुपये के इमरजेंसी लोन पैकेज की घोषणा की है। इस कदम का सबसे बड़ा फायदा स्पाइसजेट (SpiceJet) जैसी नकदी संकट से जूझ रही कंपनियों को मिलने की उम्मीद है।

क्या है सरकारी स्कीम? वित्त मंत्रालय की इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र एयरलाइन को 1,000 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर सरकारी गारंटी मिलेगी। इसके अतिरिक्त, कंपनियां 500 करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा लोन भी ले सकेंगी, बशर्ते कंपनी के प्रमोटर या मालिक भी उतनी ही राशि का निवेश खुद करें। सरकार का उद्देश्य केवल गारंटी देना है, ताकि बैंकों को कर्ज देने में आसानी हो, हालांकि बैंक अपनी प्रक्रिया और जांच के आधार पर ही ऋण जारी करेंगे।

स्पाइसजेट को मिलेगी बड़ी राहत यह पैकेज ऐसे समय में आया है जब स्पाइसजेट की हालत बेहद नाजुक है। कंपनी के करीब 37 विमान स्पेयर पार्ट्स और लीज के भुगतान न होने के कारण जमीन पर खड़े हैं। वेतन में देरी और कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजने जैसी समस्याओं के बीच यह सरकारी मदद कंपनी के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

क्यों आई यह नौबत?

  • युद्ध का असर: ईरान-इजरायल संकट के कारण खाड़ी देशों की उड़ानों में कटौती करनी पड़ी है, जिससे एयरलाइंस की कमाई घटी है।
  • तेल की कीमतें: जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों में अचानक आए उछाल ने परिचालन लागत को काफी बढ़ा दिया है।
  • बैंकों की हिचकिचाहट: जेट एयरवेज और गो फर्स्ट जैसी कंपनियों के बंद होने के बाद बैंक अब इस सेक्टर को लोन देने में कतरा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस इमरजेंसी पैकेज से न केवल कंपनियों को अपनी उड़ानों को सुचारू रखने में मदद मिलेगी, बल्कि घरेलू विमानन बाजार में एकाधिकार (Monopoly) जैसी स्थिति बनने से भी रोका जा सकेगा।

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