रमेश गुप्ता भिलाई। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर यातायात पुलिस दुर्ग और परिवहन विभाग ने रविवार को संयुक्त स्कूल बस जांच शिविर आयोजित किया। पुलिस ग्राउंड सेक्टर-6 में लगाए गए शिविर में जिले के चार शैक्षणिक संस्थानों की 51 स्कूल बसों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों और दस्तावेजों में कमी पाए जाने पर पांच बसों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई। वहीं स्वास्थ्य परीक्षण में 13 बस चालकों में रक्तचाप और शुगर संबंधी समस्याएं सामने आईं, जिन्हें चिकित्सकीय परामर्श दिया गया।

यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्कूल बसों का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान वाहन पंजीयन, परमिट, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र, रोड टैक्स और चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की गई। इसके अलावा बसों की मैकेनिकल फिटनेस भी परखी गई, जिसमें हेडलाइट, ब्रेक लाइट, इंडिकेटर, टायर, स्टीयरिंग, क्लच, एक्सीलेटर, हॉर्न, वाइपर, सीट व्यवस्था और रिफ्लेक्टर आदि शामिल रहे।

जीपीएस, सीसीटीवी और इमरजेंसी सुविधाओं की भी हुई जांच
संयुक्त टीम ने स्कूल बसों में अनिवार्य सुरक्षा सुविधाओं का भी परीक्षण किया। बसों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, सीसीटीवी कैमरा, स्पीड गवर्नर, आपातकालीन निकास द्वार, प्राथमिक उपचार पेटी, अग्निशमन यंत्र, स्कूल का नाम और संपर्क नंबर सहित अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई।
सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान पांच स्कूल बसों में निर्धारित सुरक्षा मानकों और आवश्यक दस्तावेजों संबंधी कमियां पाई गईं। इसके बाद संबंधित बसों पर चालानी कार्रवाई करते हुए संचालकों को कमियों का तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी सुरक्षा मानकों की पूर्ति के बाद ही वाहनों का संचालन किया जाए।
13 चालकों की स्वास्थ्य जांच में मिली शिकायतें
शिविर के दौरान बस चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया। जांच में 13 चालकों में उच्च रक्तचाप और शुगर संबंधी शिकायतें पाई गईं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सलाह देते हुए नियमित जांच और उपचार कराने की हिदायत दी।
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यातायात एडिशनल एसपी रिचा मिश्रा ने स्कूल संचालकों को निर्देशित किया है कि जिन बसों की जांच नहीं हो सकी है, उन्हें आगामी शिविर में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए, ताकि विद्यार्थियों के सुरक्षित परिवहन को सुनिश्चित किया जा सके।