खाद-बीज संकट से जूझ रहे किसान, केवल घोषणाओं से नहीं होगा समाधान: विधायक सावित्री मंडावीडीएपी-यूरिया की कमी से खरीफ सीजन प्रभावित होने की आशंका, विधायक ने सरकार और प्रशासन को घेराजनधारा समाचार संवाददाता अनूप वर्मा चारामा: खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले क्षेत्र में खाद और उन्नत बीजों की भारी किल्लत को लेकर किसानों की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं। क्षेत्र की सहकारी समितियों और खाद वितरण केंद्रों पर अलसुबह से ही किसानों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन मांग के अनुरूप डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

इस गंभीर स्थिति को लेकर भानुप्रतापपुर क्षेत्र की विधायक श्रीमती सावित्री मनोज मंडावी ने सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने किसानों के व्यापक हित में तुरंत जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, किसानों के साथ सरासर अन्याय हैविधायक सावित्री मंडावी ने कहा कि किसान इस समय खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारियों में पूरी ताकत से जुट चुके हैं। ऐसे नाजुक समय पर समय पर खाद न मिलना उन्हें भारी मानसिक और आर्थिक परेशानियों में डाल रहा है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा:”यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि हमारे अन्नदाताओं के साथ सरासर अन्याय है। यदि सही समय पर खाद-बीज उपलब्ध नहीं कराए गए, तो आगामी फसल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा, जिसका सीधा और आत्मघाती असर किसानों की आय पर पड़ेगा।”कालाबाजारी का आरोप: सरकारी केंद्र खाली, निजी दुकानों में ऊंचे दामविधायक ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकारी वितरण केंद्रों और सोसायटियों में किसान पर्याप्त खाद के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निजी स्तर पर ऊंचे दामों में अवैध रूप से खाद बेची जा रही है। उन्होंने खाद वितरण प्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से खाद के भंडारण, आपूर्ति और वितरण की तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा करने का आग्रह किया।केवल समर्थन मूल्य बढ़ाने से नहीं सुधरेंगे हालातकिसानों की व्यावहारिक समस्याओं को रेखांकित करते हुए श्रीमती मंडावी ने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि केवल समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ा देने की घोषणाओं से जमीन पर जूझ रहे किसानों की समस्याएं समाप्त नहीं होंगी। इसके लिए समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने खाद के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी और उनकी घटिया क्वालिटी को लेकर मिल रही शिकायतों पर भी गहरी चिंता जताई और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही वितरण व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो स्थिति और उग्र हो सकती है।