18 अप्रैल शनिवार ग्राम सभा की बैठक ग्राम परपोड़ा में रखी गई थी, जिसमें जनपद सदस्य नीरज राजपूत,सरपंच फत्तेलाल साहू ,सचिव विनोद देशलहरा, उप सरपंच मालिकराम साहू और ग्राम सहायिका के गांव के लोग उपस्थित रहे, जिसमें लगभग ढाई हजार की आबादी में ग्राम सभा में उपस्थित लोगों की संख्या 100 से 150 के बीच रही, जबकि नियमों के अनुसार 25 प्रतिशत उपस्थित नहीं होने पर ग्राम सभा की बैठक का सचिव द्वारा अनुमोदन और प्रस्ताव पारित करना संभव नहीं , उपस्थित पूर्ण न होने पर ग्राम सभा निरस्त की जानी चाहिए, दूसरा बैठक के पूर्व ही ग्राम सभा में लोगों की उपस्थिति का कोटवार द्वारा हस्ताक्षर बिना एजेंडा और प्रतिवेदन के बताए करवाया गया है, ग्राम सभा की बैठक की मुनियादी शाम को 6 से 7 बजे तक एक दिन पूर्व करवाई गई, जिससे पूरे गांव वालों को सूचना नहीं मिलती और 200 से भी कम लोग की उपस्थिति में ग्राम सभा की बैठक अमान्य नहीं की गई, क्या इसी तरह ग्राम सभा की बैठक में कार्य होते हैं ,जिसमें ग्राम सचिव को दो-तीन गांव का प्रभार है, ऐसी जानकारी स्वयं सचिव ने दी है, जिसमें की सचिव ने स्वयं कहा कि वह केवल बुधवार को गांव परपोड़ा में बैठते हैं, ऐसे में आम जनता को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, शौचालय योजना ,स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय एवं अमृत पेयजल मिशन के तहत नल जल योजना,सड़क और स्वच्छता का लाभ किस प्रकार मिल पाएगा, ना ही लोगों का जॉब कार्ड बन रहा है ना ही लोगों को रोजगार मिल रहा है, गांव का विकास रुक सा गया है, जनप्रतिनिधि चुनाव होने तक बड़े-बड़े वादे करते हैं, चुनाव के बाद चुनाव जीत कर अपने वादों को भूल जाते हैं और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है,पता नहीं गांव का विकास कब होगा, ना ही ग्राम में ग्राम सभा ठीक से चल पा रही है , ना ही लोगों की उपस्थिति है,इससे यह जाहिर होता है कि जो भी कागजों में चल रहा है उसमें हितग्राहियों को लाभ नहीं मिल रहा, जिला प्रशासन के चक्कर लगाने के अलावा लोगों के पास कुछ भी नहीं बचा, जीते हुए प्रत्याशियों के पास ना कोई योजना है ना उसको कार्यान्वित करने का कोई तरीका इससे यह पता चलता है कि सब केवल मिठाई मलाई, पूर्ति में लगे हुए हैं। यदि ऐसा नहीं है तो सभी योजनाओं की लाभार्थियों की सूची वापस मंगा कर जांच की जाए कि सही लोगों को अभी तक लाभ मिला है या नहीं जिसकी जांच क्षेत्रीय अधिकारियों से ना करवा कर बाहरी अधिकारियों से कराई जानी चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
ग्राम सभा में कोरम के अभाव और सचिव की मनमानी से परपोड़ा का विकास ठप, ग्रामीणों में भारी रोष

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