-सुभाष मिश्र
भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका और उसकी रणनीतिक सोच का स्पष्ट ऐलान है। ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहे जा रहे इस समझौते ने दुनिया की लगभग दो अरब आबादी को एक साझा आर्थिक ढांचे में जोड़ दिया है। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार संरक्षणवाद, टैरिफ वॉर और दबाव की राजनीति से जूझ रहा है, भारत और EU ने सहयोग, नियम और बहुपक्षवाद का रास्ता चुनकर दुनिया को एक मजबूत संदेश दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर जिस ‘Rule Based International Order’ पर जोर दिया, वह इस समझौते की आत्मा है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत धमकी, पेनाल्टी या एकतरफा टैरिफ की नीति के बजाय अंतर्राष्ट्रीय नियमों, कानून के शासन और संस्थागत व्यवस्था में विश्वास करता है। यह संदेश अप्रत्यक्ष रूप से उन ताकतों के लिए भी है जो व्यापार को राजनीतिक दबाव का हथियार बना रही हैं। भारत ने दिखा दिया है कि स्थायी साझेदारी का आधार सहयोग और भरोसा होता है, न कि डर।
आर्थिक दृष्टि से यह समझौता भारत के लिए ऐतिहासिक है। यूरोपियन यूनियन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आर्थिक ब्लॉक है और भारत सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था। इस FTA के बाद यूरोप भेजे जाने वाले अधिकांश भारतीय उत्पादों पर टैरिफ खत्म या बेहद कम हो जाएंगे। इससे भारत को हर साल अरबों डॉलर की बचत होगी, निर्यात को नई रफ्तार मिलेगी और ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक मंच पर मजबूती मिलेगी। टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल, आईटी और कृषि जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
इसका लाभ केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम भारतीय तक पहुंचेगा। यूरोप से आने वाले कई उत्पाद सस्ते होंगे, किसानों को बड़ा बाजार मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। यूरोपीय कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ने से तकनीक हस्तांतरण, कौशल विकास और औद्योगिक विस्तार को भी बल मिलेगा। यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
रणनीतिक स्तर पर भी यह डील उतनी ही महत्वपूर्ण है। FTA के साथ भारत और EU के बीच रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को औपचारिक रूप दिया गया है। काउंटर टेररिज्म, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत करेगा। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यवस्था अस्थिरता से गुजर रही है, यह साझेदारी अंतर्राष्ट्रीय सिस्टम में संतुलन और स्थिरता लाने का काम करेगी।
यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का यह कहना कि “जब भारत सफल होता है, तो दुनिया सफल होती है”, भारत की बदली हुई वैश्विक छवि को दर्शाता है। भारत अब केवल उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक समाधान का हिस्सा और नियम-निर्माता बनता जा रहा है। EU के साथ यह समझौता इस बात का प्रमाण है कि भारत बहुपक्षवाद, लोकतंत्र और कानून के शासन के मूल्यों के साथ खड़ा है।
कुल मिलाकर, भारत-EU FTA एक ऐसे नए युग की शुरुआत है जहां व्यापार केवल मुनाफे का साधन नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग और स्थिरता का माध्यम है। यह समझौता भारत की आर्थिक शक्ति को नई ऊंचाई देता है, उसकी कूटनीतिक साख को मजबूत करता है और आम नागरिक के जीवन में प्रत्यक्ष लाभ की संभावना पैदा करता है। बदलती दुनिया में यह डील भारत के आत्मविश्वास और दूरदर्शी नेतृत्व की स्पष्ट अभिव्यक्ति है।