कोरबा, 18 जनवरी 2026
धान खरीदी अभियान के अंतिम पखवाड़े में शासन की अव्यवस्थाएं नहीं थम रही हैं। कस्टम मिलिंग उपार्जन नीति के तहत कई जिलों में धान रीसाइक्लिंग के मामले आने के बाद मार्कफेड ने समिति स्तर से धान लोडिंग पर रोक लगा दी है। इस फैसले का असर कोरबा जिले समेत पूरे प्रदेश के उपार्जन केंद्रों पर पड़ रहा है।
मार्कफेड के मिलर मॉड्यूल में लोडिंग रोक की सूचना प्रदर्शित होते ही राइस मिलर्स और सहकारी समितियों में हड़कंप मच गया। ऑनलाइन गेट पास जारी न होने से शनिवार को किसी उपार्जन केंद्र से धान उठाव के लिए वाहन नहीं पहुंच सके। इससे पहले से दबाव में चल रही धान खरीदी व्यवस्था और संकट में आ गई है।
आकांक्षी जिला कोरबा में इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा असर है। जिले की 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों में खरीदा गया 6 लाख 56 हजार 740.40 क्विंटल धान, जिसकी कीमत 151 करोड़ 5 लाख 2 हजार 920 रुपये है, पूरी तरह जाम हो गया है। यदि जल्द उठाव शुरू नहीं हुआ तो धान की कमी, गुणवत्ता खराब होने और जगह की कमी से खरीदी प्रक्रिया बंद होने की आशंका है।
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने से पहले किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी का वादा किया गया था। बीते दो वर्षों में सरकार ने इसे निभाया, लेकिन चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। किसानों के एग्रिस्टैक पोर्टल में पंजीयन, डिजिटल क्रॉप सर्वे, गिरदावरी, सत्यापन और टोकन प्रणाली के बाद अब समिति स्तर पर खरीदे धान का उठाव भी बाधित है।
कोरबा जिले को चालू वर्ष में 31 लाख 19 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य दिया गया था। अब तक 33 हजार 846 किसानों से 20 लाख 63 हजार 575.20 क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 31.72 प्रतिशत धान अभी उठाव के इंतजार में है।
हाथी प्रभावित बरपाली (कोरबा), बरपाली (श्यांग), कुदमुरा, चचिया, सिरमिना, उतरदा, अखरापाली सहित दो दर्जन से अधिक उपार्जन केंद्रों में बफर लिमिट से अधिक धान जमा है। नियमित उठाव से ही शेष किसानों के लिए जगह बन सकती है, लेकिन शासन स्तर पर परिवहन रोक से समितियां गंभीर संकट में हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो किसानों को नुकसान होगा और धान खरीदी अभियान पर बड़ा संकट मंडरा सकता है।