भानुप्रतापपुर। नगर की जनता जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और रोजगार जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है, वहीं इन दिनों शहर की राजनीति एक अलग ही मुद्दे पर सुलगती नजर आ रही है। भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच मुख्य चौक पर पटाखे फोड़ने को लेकर छिड़ा विवाद अब सियासी घमासान का रूप ले चुका है।
नगर में चर्चा इस बात की है कि जिन मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों को जनता की आवाज बनना चाहिए था, वे मुद्दे पीछे छूट गए हैं और पटाखों की गूंज ने राजनीति का केंद्र बिंदु ले लिया है। एक पक्ष द्वारा जश्न मनाने के लिए पटाखे फोड़े जाने के बाद दूसरे पक्ष ने इसका विरोध किया, जिसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में अस्पतालों की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं, कई वार्डों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है, युवाओं के रोजगार और किसानों की समस्याएं भी बरकरार हैं, लेकिन राजनीतिक दल इन मुद्दों पर एकजुट होने के बजाय पटाखा विवाद में उलझे दिखाई दे रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद केवल पटाखों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों दलों के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का परिणाम है। चौक पर फूटे पटाखों की आवाज अब सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों तक पहुंच गई है, जहां समर्थक एक-दूसरे पर जमकर निशाना साध रहे हैं।
इधर आम जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर नगर के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषयों पर कब बहस होगी? क्या राजनीति अब जनहित के मुद्दों से भटककर केवल प्रतीकात्मक टकराव तक सिमटती जा रही है?
फिलहाल भानुप्रतापपुर में पटाखों से ज्यादा सियासी चिंगारियां फूट रही हैं और जनता अपने असली मुद्दों के जवाब का इंतजार कर रही है।