पिथौरा चिरायु दल की सराहनीय पहल, 7 माह के मासूम के हृदय का मुंबई में हुआ निःशुल्क ऑपरेशन

पिथौरा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) अंतर्गत कार्यरत चिरायु दल पिथौरा ने एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता एवं तत्परता का परिचय देते हुए 7 माह के मासूम राजकुमार साहू के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बच्चे के हृदय में गंभीर जन्मजात बीमारी होने के कारण उसकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी तथा जान का खतरा बना हुआ था।
राजकुमार साहू, पिता गोवर्धन साहू एवं माता दीपा साहू निवासी खपराखोल ठाकुरदिया पिथौरा का स्वास्थ्य परीक्षण चिरायु दल द्वारा किया गया। जांच के दौरान चिरायु दल के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेन्द्र प्रजापति ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल उसे शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बिशाल को दिखाया। विशेषज्ञ परामर्श में बच्चे को गंभीर हृदय रोग से पीड़ित पाया गया।
रायपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि इतनी कम उम्र में बच्चे का उपचार स्थानीय स्तर पर अत्यंत जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसके बाद चिरायु दल के प्रभारी डॉ. वीरेन्द्र प्रजापति ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव के निर्देशन, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती नीलू घृतलहरे, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला सलाहकार अनुपम शर्मा तथा खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. तारा अग्रवाल के मार्गदर्शन में त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूर्ण कर बच्चे को उच्च स्तरीय उपचार हेतु मुंबई रेफर कराया।
मुंबई स्थित SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बच्चे के हृदय की सफल सर्जरी की गई। उपचार पूर्णतः निःशुल्क रहा। सफल ऑपरेशन के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हुआ और वर्तमान में बच्चा पूर्णतः स्वस्थ है।
हाल ही में चिरायु दल पिथौरा की टीम ने बच्चे के घर पहुंचकर उसके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इस दौरान आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेन्द्र प्रजापति, डॉ. तनुजा चंद्राकर, फार्मासिस्ट लेखरंजन पटेल, एएनएम राजकुमारी बंजारे एवं लैब टेक्नीशियन बेनुराम सिन्हा उपस्थित रहे।
घर पर बच्चे के नाना दुकालू साहू, परनाना भगतराम साहू सहित परिवार के सभी सदस्य मौजूद थे। परिजनों ने चिरायु दल एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता और मार्गदर्शन के कारण उनके बच्चे को नया जीवन मिला है।
चिरायु दल की यह पहल न केवल स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील कार्यप्रणाली को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि समय पर पहचान, उचित परामर्श और त्वरित रेफरल से गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों को नया जीवन प्रदान किया जा सकता है।
उक्त जानकारी विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक जयकांत विश्वकर्मा द्वारा प्रदान की गई।

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