अनूप वर्मा, संवाददाता (जनधारा न्यूज़)
स्थान: चरामा (छत्तीसगढ़) | दिनांक: 18 जुलाई 2026
चरामा नगर में कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। बीते 15 दिनों के भीतर नगर में चोरी की यह दूसरी बड़ी वारदात सामने आई है। इस घटना ने जहाँ एक ओर पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है, वहीं आम नागरिकों के बीच भारी दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
रामसप्ताह चौक में धावा: जांच में जुटी पुलिस
मिली जानकारी के अनुसार, इस बार शातिर चोरों ने नगर के सबसे व्यस्तम इलाकों में से एक ‘रामसप्ताह चौक’ को अपना निशाना बनाया है। घटना के बाद से ही स्थानीय पुलिस पूरी तरह हरकत में आ गई है। पुलिस हर एंगल से मामले की बारीकी से जांच कर रही है। चोरों का सुराग लगाने के लिए आसपास के निजी प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं और संदिग्ध व्यक्तियों की धरपकड़ के लिए पहचान की जा रही है।
जल्द सलाखों के पीछे होंगे चोर: थाना प्रभारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी सुरेश राठौर ने दावा किया है कि पुलिस को कुछ बेहद अहम सुराग हाथ लगे हैं। चोर चाहे कहीं भी छिपे हों, बहुत जल्द वे पुलिस की गिरफ्त में होंगे। उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि दो से तीन दिनों के भीतर इस चोरी का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
पिछली चोरी में दिखी थी पुलिस की मुस्तैदी
गौरतलब है कि इससे पहले हुई चोरी की वारदात में चरामा पुलिस ने बेहतरीन कार्यप्रणाली का प्रदर्शन किया था। तब पुलिस की तत्परता के कारण महज 2 से 3 दिनों के भीतर ही आरोपियों को गिरफ्तार कर शत-प्रतिशत सामान बरामद कर लिया गया था। पुलिस की उसी मुस्तैदी की उम्मीद इस बार भी की जा रही है।
बड़ा खुलासा: 35 में से सिर्फ 5 कैमरे चालू, साल भर से खत्म है टेंडर!
इस पूरी घटना के बाद एक बार फिर नगर की सुरक्षा के सबसे बड़े स्तंभ यानी सरकारी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की पोल खुल गई है:
लापरवाही का आलम: कुछ साल पहले पुलिस विभाग और शासन की ओर से नगर के मुख्य चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के लिहाज से 30 से 35 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे।
धूल खा रही तीसरी आंख: वर्तमान स्थिति यह है कि इन 35 कैमरों में से मुश्किल से 4 या 5 कैमरे ही चालू हालत में हैं, बाकी सभी बंद और खराब पड़े हैं।
क्यों नहीं सुधरे कैमरे?: सूत्रों के मुताबिक, जिस कंपनी को इन कैमरों के रखरखाव (मेंटेनेंस) का जिम्मा दिया गया था, उसका टेंडर खत्म हुए एक साल से भी अधिक का समय बीत चुका है। नया टेंडर जारी न होने के कारण ये कैमरे भगवान भरोसे छोड़ दिए गए हैं।
ऐसे में जनता के बीच यह गंभीर सवाल उठ रहा है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर इतनी बड़ी लापरवाही क्यों बरती जा रही है?
‘यह उच्च स्तरीय मामला है, लेकिन कैमरे चालू होने चाहिए’
सरकारी कैमरों के बंद होने के मुद्दे पर जब थाना प्रभारी सुरेश राठौर से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि अधिकांश कैमरे बंद पड़े हैं। उन्होंने कहा:
“यह एक उच्च स्तरीय और उच्च अधिकारियों से जुड़ा हुआ तकनीकी मामला है। हालांकि, सुरक्षा के दृष्टिकोण से नगर के सभी सरकारी सीसीटीवी कैमरों का चालू रहना बेहद अनिवार्य है।”
थाना प्रभारी ने व्यापारियों और आम जनता से की यह विशेष अपील
सरकारी कैमरों की इस भारी कमी के बीच, थाना प्रभारी ने नगरवासियों और दुकानदारों से एक महत्वपूर्ण अपील की है:
निजी कैमरे लगवाएं: सभी सक्षम नागरिक और व्यापारी अपने-अपने घरों और दुकानों में निजी सीसीटीवी कैमरे जरूर लगवाएं।
सही एंगल का रखें ध्यान: कैमरा लगाते समय एक रुख (एंगल) दुकान/घर के एंट्रेंस और दूसरा मुख्य सड़क की तरफ रखें, जहां से आने-जाने वाले साफ दिखाई दें।
जांच में होगी आसानी: भविष्य में यदि कभी चोरी, दुर्घटना या कोई अन्य अप्रिय घटना घटती है, तो इन निजी कैमरों के फुटेज से अपराधियों तक तुरंत पहुंचा जा सकेगा।
आम नागरिकों की मांग: सुरक्षा पर लाखों खर्च, तो मेंटेनेंस क्यों नहीं?
बढ़ती वारदातों से सहमे नगरवासियों का कहना है कि जब सरकार सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर हर साल लाखों-करोड़ों रुपए खर्च करती है, तो इन कैमरों के मेंटेनेंस पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा? अगर मुख्य चौक-चौराहों पर सरकारी कैमरे चालू रहते हैं, तो पुलिस को किसी भी क्राइम केस को सुलझाने में बहुत बड़ी मदद मिलती है।
आम जनता ने शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि बिना किसी देरी के नया टेंडर पास कर नगर के सभी खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को तत्काल सुधारा जाए और उनके नियमित मेंटेनेंस की स्थाई व्यवस्था की जाए।