रायपुर: छत्तीसगढ़ की माटी की महक और पंडवानी कला को सात समंदर पार पहुंचाने वाली डॉ. तीजन बाई भले ही पंचतत्व में विलीन हो चुकी हैं, लेकिन उनकी विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिए साय सरकार ने चौतरफा कदम उठाए हैं। संस्कृति से लेकर स्कूल शिक्षा विभाग तक ने तीजन बाई के ऐतिहासिक योगदान को सहेजने के लिए बड़े फैसलों पर मुहर लगाई है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने श्रद्धांजलि सभा के दौरान लोक कला के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करने वाली निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:
1. लोक कलाकारों के लिए ‘पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान’
छत्तीसगढ़ सरकार अब हर साल राज्य अलंकरण समारोह में पंडवानी और लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कलाकारों को ‘डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान’ से नवाजेगी। इस पुरस्कार का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और पारंपरिक लोक कला से जोड़े रखना है।
2. ‘कला ग्राम’ के रूप में चमकेगा पैतृक गांव गनियारी
तीजन बाई के जन्मस्थान और कर्मभूमि गनियारी गांव को अब एक वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। सरकार इसे एक हाईटेक ‘कला ग्राम’ के रूप में विकसित करेगी, जहाँ देश-विदेश से आने वाले शोधकर्ताओं और लोक कलाकारों के लिए प्रशिक्षण, मंच और सांस्कृतिक माहौल तैयार किया जाएगा।
3. शासकीय स्कूल का बदला जाएगा नाम
आने वाली पीढ़ी अपनी माटी की इस महान कलाकार से प्रेरणा ले सके, इसके लिए दुर्ग जिले के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, गनियारी का नामकरण अब ‘डॉ. तीजन बाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय’ के रूप में करने का आधिकारिक निर्णय लिया गया है।
4. रायपुर के म्यूजियम में सजेगा ऐतिहासिक तंबूरा
पंडवानी गाते समय तीजन बाई के हाथों में जो तंबूरा कभी साक्षात् ‘गांडीव धनुष’ की तरह नजर आता था, वह अब हमेशा के लिए रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय की शोभा बढ़ाएगा। इस धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए एक सांस्कृतिक इतिहास के रूप में संरक्षित किया जा रहा है।
एक नजरिया: कलाकार शारीरिक रूप से विदा हो जाते हैं, लेकिन उनकी कला और नाम अमर रहते हैं। सरकार की इन जमीनी पहलों से न सिर्फ तीजन बाई का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज रहेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को भी एक नया जीवन मिलेगा।