रायपुर: छत्तीसगढ़ भाजपा ने अपने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए नई कोर कमेटी की घोषणा कर दी है। इस नई लिस्ट में पार्टी ने सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। राष्ट्रीय नेतृत्व की मुहर लगने के बाद जारी हुई इस सूची में कई नए चेहरों को जगह मिली है, तो वहीं राजनीति के कई धुरंधरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
नई टीम में इन चेहरों को मिली जगह पार्टी की इस सबसे पावरफुल कमेटी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और दोनों उपमुख्यमंत्री—अरुण साव व विजय शर्मा को शामिल किया गया है। सबसे चौंकाने वाला और अहम नाम वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी का है, जिन्हें नई कोर कमेटी में एंट्री मिली है। इनके अलावा संगठन के अनुभवी नेता अजय जामवाल, पवन साय, अमर अग्रवाल, लता उसेंडी, शिवरतन शर्मा और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी को भी टीम में बरकरार रखा गया है।
इन दिग्गजों का कटा पत्ता इस बार की सूची में सबसे ज्यादा चर्चा उन नामों की है जिन्हें बाहर किया गया है। पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को इस बार कोर कमेटी में जगह नहीं मिली है। उनके साथ ही कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल का नाम भी लिस्ट से गायब है। बड़े नेताओं को कमेटी से बाहर रखने के इस फैसले को संगठन के भीतर ‘पीढ़ीगत बदलाव’ और ‘नई रणनीति’ के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या है भाजपा की नई रणनीति? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा अब भविष्य की चुनौतियों के लिए नई लीडरशिप को तैयार कर रही है। नई कोर कमेटी में उन नेताओं को तरजीह दी गई है जो वर्तमान में सरकार और संगठन के बीच सेतु का काम कर रहे हैं। कमेटी गठन के साथ ही पार्टी ने आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और संगठन विस्तार की रूपरेखा पर भी चर्चा शुरू कर दी है।
इस बदलाव के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी के भीतर इन वरिष्ठ नेताओं की भूमिका क्या रहती है। फिलहाल, नई टीम के सामने प्रदेश में संगठन को और मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी है।