दुनिया की जानी-मानी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने वर्कफोर्स में कटौती करने का निर्णय लिया है। कंपनी अपने कुल कर्मचारियों में से लगभग 2.1 फीसदी यानी करीब 4,800 लोगों की छंटनी करने जा रही है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब कंपनी अपने कामकाज में सुधार लाने और भविष्य की नई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रही है।
टेक कंपनियों पर लागत का भारी दबाव
टेक सेक्टर में यह बदलाव सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट तक सीमित नहीं है। इससे पहले अमेजन और मेटा जैसी बड़ी दिग्गज कंपनियां भी हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी हैं। बड़ी टेक कंपनियों पर इस समय नई तकनीकों के विकास के लिए भारी निवेश का दबाव है। अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में कंपनियां इस दिशा में 700 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करेंगी। अपनी बढ़ती लागत को नियंत्रित करने के लिए कंपनियां कर्मचारियों की संख्या में कटौती जैसे कड़े फैसले लेने को मजबूर हैं।

शेयर बाजार में माइक्रोसॉफ्ट को झटका
माइक्रोसॉफ्ट के लिए यह साल चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी के शेयरों में इस साल भारी गिरावट देखी गई है। साल 2026 की पहली छमाही में कंपनी के शेयर लगभग 23 फीसदी तक नीचे गिर चुके हैं। यह साल 2022 के बाद कंपनी का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले भी कंपनी ने अमेरिका में करीब 9,000 कर्मचारियों को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का ऑफर दिया था।
क्लाउड कारोबार और भविष्य की चुनौतियां
भले ही कंपनी छंटनी का दौर देख रही है, लेकिन उसका क्लाउड कारोबार यानी एज़्योर (Azure) लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। यह क्लाउड सेवा बड़े पैमाने पर कंपनियों को डेटा सुरक्षित रखने और ऑनलाइन काम करने की सुविधा देती है। माइक्रोसॉफ्ट के लिए चुनौती यह है कि नई सेवाओं के लिए बड़े डेटा सेंटर बनाने में जो पैसा खर्च हो रहा है, वह कंपनी के बजट पर गहरा दबाव डाल रहा है। कंपनी अपनी रणनीति को संतुलित करने की कोशिश में है ताकि भविष्य के मुनाफे को सुरक्षित किया जा सके।