नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर एक अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन करे। यह ट्रिब्यूनल उन अपीलों पर सुनवाई करेगा जिन्हें न्यायिक अधिकारियों द्वारा खारिज कर दिया गया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई न्यायिक अधिकारी किसी अर्जी को खारिज करता है, तो उसे इसका ठोस कारण भी बताना होगा। इस ट्रिब्यूनल का खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने बताया कि अब तक करीब 7 लाख मामलों का निपटारा किया गया है और 57 लाख मामले अभी लंबित हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 10 लाख से ज्यादा आपत्तियों का निराकरण किया जा चुका है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना गलत है और इससे प्रणाली पर अविश्वास का संकेत जाता है। कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने वालों को अवमानना नोटिस जारी किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड से 500 से अधिक न्यायिक अधिकारियों को इस कार्य के लिए तैनात किया गया है, जो दिन-रात काम कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इन अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, जो उनके समर्पण को दर्शाता है। इससे अधिक त्याग की उम्मीद नहीं की जा सकती।
न्यायालय ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह न्यायिक अधिकारियों को हर संभव लॉजिस्टिक मदद मुहैया कराए। राज्य सरकार को भी आदेश दिया गया है कि वे अधिकारियों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं। साथ ही, चुनाव आयोग को ऐसे किसी भी नियम को लागू करने से मना किया गया है जिससे काम में बाधा उत्पन्न हो। यदि न्यायिक अधिकारियों को आवश्यकता हो, तो नई लॉगिन आईडी तत्काल प्रभाव से जारी की जानी चाहिए।