कोरिया, 23 फरवरी 2026/ जिला पंचायत कोरिया के ऑडिटोरियम में पहली बार “रोगी सहायता समूह” की शुरुआत कोरिया जिला से की गई। इस जिला स्तरीय बैठक का आयोजन जिला स्वास्थ्य समिति कोरिया, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एकम फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सिकल सेल जैसे गैर-संचारी रोग से पीड़ित बच्चों एवं उनके अभिभावकों को एक साझा मंच प्रदान करना था।
इस अवसर पर कोरिया कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष मोहित पैकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष वंदना राजवाड़े, नगर पालिका अध्यक्ष नमिता शिवहरे, स्वास्थ्य विभाग की सभापति सुषमा कोरम, यूनीसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह एवं उनकी टीम, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. आयुष जायसवाल उपस्थित रहे।
जिले के 44 सिकल सेल पीड़ित बच्चों एवं उनके अभिभावकों की सहभागिता के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में सामान्य नागरिकों को सिकल सेल रोग के कारण, लक्षण, उपचार एवं बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और विवाह पूर्व सिकलिंग टेस्ट कराने की सलाह देकर रोग के प्रसार को रोकने पर विशेष जोर दिया गया।
भारत में गैर-संचारी रोगों के कारण प्रतिवर्ष लगभग 4.1 करोड़ मौतें होती हैं। हृदय रोग, मधुमेह, पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियां एवं कैंसर जैसी बीमारियों से होने वाली कुल मौतों में भारत का लगभग 64 प्रतिशत योगदान है। इससे न केवल सामाजिक बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। इसी परिप्रेक्ष्य में शासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता बढ़ाने तथा रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान मरीजों और उनके परिजनों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जिले में इस प्रकार का कार्यक्रम पहली बार आयोजित हुआ, जहाँ उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना गया। उन्हें सिकल सेल प्रमाण पत्र एवं उससे मिलने वाले लाभों की जानकारी दी गई, जिससे उनमें विश्वास और आत्मसम्मान की भावना मजबूत हुई।
एक मरीज के पिता ने भावुक होकर बताया कि उनके बच्चे को पिछले तीन वर्षों से नियमित रूप से रक्त चढ़ाना पड़ता था। डॉक्टर की सलाह पर हाइड्रॉक्स्यूरिया दवा शुरू करने के बाद रक्त चढ़ाने की आवश्यकता में उल्लेखनीय कमी आई। उनके अनुभव ने अन्य अभिभावकों को उपचार के प्रति आश्वस्त और प्रेरित किया।
अंत में सभी ने सिकल सेल रोग से संबंधित ऐसे जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर आयोजित करने पर सहमति दी ताकि मरीजों को सही जानकारी, सहयोग और आत्मविश्वास मिलता रहे।