रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को इस राष्ट्रीय दायित्व को पूरी सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री रायपुर में आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय जनगणना प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद देश की आठवीं जनगणना होगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह कार्य शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। यदि आंकड़े त्रुटिपूर्ण हुए तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा, इसलिए एक भी परिवार गणना से छूटना नहीं चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि यह देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण के तहत मकानों की सूचीकरण और गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित होगा। यह अभियान प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और लगभग 20 हजार गांवों में चलाया जाएगा।
सम्मेलन में मुख्य सचिव विकासशील ने अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने मैदानी कर्मियों के लिए सपोर्टिव सुपरविजन तकनीक अपनाने और नई भवन अनुज्ञाओं को पहले से ट्रेस करने पर जोर दिया ताकि कोई संरचना न छूटे। उन्होंने सीमावर्ती जिलों में गणना के दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा।
इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि भारतीय जनगणना 150 वर्षों की परंपरा वाला दुनिया का सबसे बड़ा सांख्यिकीय कार्य है। यह नीति निर्धारण के लिए बुनियादी आंकड़ों का सबसे विश्वसनीय स्रोत है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने भी कलेक्टरों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस प्रशिक्षण सम्मेलन में राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों सहित सभी जिलों के कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त उपस्थित थे।