प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार की सुबह देश के कई बड़े राज्यों में एक साथ बहुत बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में कुल 13 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह पूरी कार्रवाई अवैध तरीके से देश में लोगों को घुसाने और उनके संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामले को लेकर की गई है। इस अचानक हुई छापेमारी के बाद से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और देश भर में illegal immigration and money laundering prevention से जुड़ी कानूनी व्यवस्थाओं पर एक बार फिर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है।
यह पूरी कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून यानी धन शोधन निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत की गई है। ईडी के लखनऊ जोन की टीम ने संबंधित राज्यों की स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर सुबह-सुबह संदिग्धों के ठिकानों पर दस्तक दी। जिन मुख्य इलाकों में तलाशी ली जा रही है, उनमें नई दिल्ली का बाटला हाउस और मदनपुर खादर शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, महाराष्ट्र के रायगढ़ और पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगna, कोलकाता और मुर्शिदाबाद में भी सुबह से ही तलाशी अभियान जारी है।
संदिग्ध संस्थानों और सोसायटियों के दफ्तरों को खंगाल रही है टीम
जांच टीम दिल्ली के मदनपुर खादर में सन शाइन हेल्थ एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के दफ्तर में दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में कबीरबाग मिल्लत एकेडमी और हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम जैसे संस्थानों के परिसरों में भी छानबीन की जा रही है। अधिकारियों को शक है कि इन संस्थाओं की आड़ में कुछ संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश की पुलिस एटीएस द्वारा दर्ज की गई एक पुरानी प्राथमिकी से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने एक ऐसे बड़े संगठित गिरोह का पता लगाया था जो रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध तरीके से भारत की सीमा में प्रवेश कराता था। यह गिरोह न सिर्फ लोगों को देश में लाता था, बल्कि उनके लिए फर्जी आधार कार्ड और अन्य भारतीय पहचान पत्र भी तैयार करवाता था ताकि वे आसानी से देश के अलग-अलग हिस्सों में बस सकें।
चैरिटेबल ट्रस्टों के जरिए पैसे को इधर-उधर करने का बड़ा खेल
अधिकारियों ने बताया कि अब तक की शुरुआती जांच में एक बहुत ही जटिल वित्तीय नेटवर्क का पता चला है। इसमें कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और सामाजिक संस्थाएं शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्हें विदेशों से भारी मात्रा में चंदा और गुप्त धन मिलता था। इस पैसे को छिपाने के लिए गिरोह के लोग म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल करते थे। म्यूल अकाउंट का आसान मतलब यह होता है कि किसी सीधे-साधे या अनजान व्यक्ति के बैंक खाते को पैसों के अवैध लेन-देन के लिए इस्तेमाल करना।
इस गिरोह ने कई बैंक खातों में अलग-अलग चरणों में पैसे ट्रांसफर किए ताकि कोई आसानी से इस रकम को पकड़ न सके। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा सीधे नकद यानी कैश के रूप में निकाला गया। इसके अलावा बहुत छोटे-छोटे ट्रांसफर के जरिए संदिग्ध लोगों तक यह पैसा पहुंचाया गया था। ईडी की टीम अब इन सभी बैंक खातों और मिले दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि इस नेटवर्क के मुख्य सरगना तक पहुंचा जा सके।