बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रामीण अभियांत्रिक सेवा में वर्ष 2011 में नियुक्त किए गए 66 उप अभियंताओं (सिविल) की नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया वैधानिक नियमों के विपरीत संपन्न की गई थी।
यह मामला याचिकाकर्ता रवि तिवारी द्वारा अधिवक्ता शाल्विक तिवारी के माध्यम से दायर किया गया था, जिसमें भर्ती की वैधता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने पाया कि विज्ञापन की शर्तों के अनुसार अभ्यर्थियों के पास कट-ऑफ तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होनी अनिवार्य थी। हालांकि, कई नियुक्त अभ्यर्थियों ने आवश्यक डिग्री या डिप्लोमा इस तिथि के बाद प्राप्त किया था, जिसके कारण उनकी नियुक्तियां शुरू से ही अवैध मानी गईं।
न्यायालय ने जांच में यह भी पाया कि विभाग ने विज्ञापित 275 पदों की संख्या से अधिक नियुक्तियां कर दी थीं, जो सेवा कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि संबंधित अभियंता पिछले 14 वर्षों से सेवा में हैं, इसलिए सहानुभूति के आधार पर उन्हें पद पर बने रहने दिया जाए। अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि लंबी सेवा अवधि किसी भी अवैध नियुक्ति को कानूनी मान्यता नहीं दे सकती और न ही वैधानिक शर्तों के साथ समझौता किया जा सकता है। इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने सभी 66 नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया है।