26 जनवरी: भारत में गणतंत्र का उत्सव, ऑस्ट्रेलिया में इतिहास और बहस का दिन…

आस्ट्रेलिया से प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा

आस्ट्रेलिया। 26 जनवरी की तारीख भारत और ऑस्ट्रेलिया दो लोकतांत्रिक देशों के लिए विशेष महत्व रखती है, लेकिन इस तारीख का ऐतिहासिक अर्थ और भावनात्मक संदर्भ दोनों देशों में पूरी तरह अलग हैं। भारत में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में यही दिन Australia Day यानी राष्ट्रीय दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान के लागू होने के साथ देश एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। यह दिन भारतीय लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और जनता की सर्वोच्चता का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक विरासत का प्रदर्शन किया जाता है। यह दिन औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के बाद आत्मनिर्णय और राष्ट्र-निर्माण की यात्रा को रेखांकित करता है।

इसके विपरीत, ऑस्ट्रेलिया में 26 जनवरी 1788 की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जब ब्रिटेन का ‘फर्स्ट फ्लीट’ सिडनी कोव पहुँचा था। 11 जहाज़ों के इस बेड़े में कैदी, सैनिक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। इसी दिन गवर्नर आर्थर फिलिप द्वारा ब्रिटिश झंडा फहराए जाने के साथ ऑस्ट्रेलिया में औपचारिक रूप से ब्रिटिश शासन की शुरुआत हुई। इसी घटना की स्मृति में हर साल 26 जनवरी को Australia Day मनाया जाता है।

ऑस्ट्रेलिया के उपनिवेशीकरण की पृष्ठभूमि 1770 तक जाती है, जब कैप्टन जेम्स कुक ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट का मानचित्रण कर उस भूमि पर ब्रिटेन के नाम से दावा किया था। उस समय यूरोपीय सोच के तहत इस भूभाग को ‘टेरा नलियस’ यानी किसी के अधिकार में न होने वाली भूमि माना गया, जबकि वास्तव में वहाँ हजारों वर्षों से Aboriginal और Torres Strait Islander समुदाय निवास कर रहे थे।

इसी कारण 26 जनवरी का दिन ऑस्ट्रेलिया के स्वदेशी समुदायों के लिए उत्सव का नहीं, बल्कि पीड़ा और संघर्ष की याद का दिन माना जाता है। वर्ष 1938 में, ब्रिटिश उपनिवेश की 150वीं वर्षगांठ के दौरान, Aboriginal नेताओं ने पहली बार इस दिन को ‘डे ऑफ मॉर्निंग’ के रूप में मनाया था। आज कई स्वदेशी समुदाय और उनके समर्थक 26 जनवरी को ‘इन्वेज़न डे’ या ‘सर्वाइवल डे’ कहते हैं, जो उनके लिए भूमि हानि, सांस्कृतिक विनाश और लंबे संघर्ष का प्रतीक है।

इसके बावजूद, ऑस्ट्रेलिया में Australia Day को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नागरिकता समारोह, राष्ट्रीय सम्मान समारोह, सामुदायिक कार्यक्रम और पारिवारिक आयोजन होते हैं। सरकार और कई संस्थाएँ इसे आधुनिक, बहुसांस्कृतिक ऑस्ट्रेलिया की उपलब्धियों और एकता के उत्सव के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

हाल के वर्षों में 26 जनवरी को लेकर ऑस्ट्रेलिया में सामाजिक बहस और विरोध तेज़ हुए हैं। कई शहरों में स्वदेशी अधिकारों, भूमि न्याय और ऐतिहासिक पुनर्संयोजन की मांग को लेकर रैलियाँ और प्रदर्शन होते हैं। वर्ष 2025 में भी Australia Day के अवसर पर Invasion और Survival Day से जुड़े विरोध कार्यक्रम देखे गए। इसी संदर्भ में राष्ट्रीय दिवस की तारीख बदलने की मांग लगातार उठती रही है।

एक ही तारीख 26 जनवरी भारत और ऑस्ट्रेलिया के लिए दो अलग-अलग ऐतिहासिक कहानियाँ बयान करती है। भारत के लिए यह तारीख लोकतंत्र और संविधान की जीत का प्रतीक है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में यह दिन औपनिवेशिक अतीत, उसकी विरासत और उससे जुड़े विवादों की याद दिलाता है। यही अंतर इस तारीख को वैश्विक संदर्भ में विशेष बनाता है।

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