रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार प्रदेश के सभी जिलों में मंडल कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की नियुक्ति की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने AICC महासचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट की मंजूरी के बाद इस संबंध में सूची जारी की। पार्टी ने जिलेवार कुल 1,370 मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति की है।
कांग्रेस का दावा है कि इस फैसले से पार्टी का जमीनी संगठन मज़बूत होगा और कार्यकर्ताओं को सीधे तौर पर नेतृत्व से जोड़ा जा सकेगा। कांग्रेस ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब भाजपा का मंडल और बूथ स्तर का संगठन उसकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस में पहली बार मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच महीनों से यह प्रक्रिया चल रही थी और आने वाले दो महीनों में प्रदेशभर में 27 हजार बूथ कमेटियों का गठन भी पूरा कर लिया जाएगा। बैज ने इसे संगठन को चुनावी मोड में लाने की दिशा में अहम कदम बताया।
वहीं कांग्रेस के इस फैसले पर सियासत भी तेज़ हो गई है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस का यह कदम अच्छी बात है और उसे भाजपा से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा के संगठन की ताकत सबको समझ में आती है और राष्ट्रवाद जैसे विषयों को लोगों के मन तक पहुंचाने में मजबूत संगठन की अहम भूमिका होती है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंडल स्तर पर संगठन खड़ा करना कांग्रेस की रणनीतिक मजबूरी भी है। हालिया चुनावी नतीजों के बाद पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह ज़मीनी स्तर पर दोबारा सक्रिय हो रही है। वहीं भाजपा इसे अपनी कार्यशैली की नकल बताते हुए कांग्रेस पर हमला कर रही है।
कुल मिलाकर, मंडल स्तर पर संगठन को मज़बूत करने की कांग्रेस की यह कवायद आने वाले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। अब देखना होगा कि यह नया मंडल ढांचा ज़मीन पर कितना असरदार साबित होता है और आगामी चुनावी तैयारियों में कांग्रेस को कितनी मजबूती देता है।