Sakti Fake Computer Center : सक्ती। जांजगीर, चांपा और सक्ती में शिक्षा का अधिकार दिलाने और युवाओं के भविष्य को संवारने के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। नगर में बिना किसी मान्यता और वैधानिक स्वीकृति के अंजनेय विश्वविद्यालय, मैट्स विश्वविद्यालय, सी वी रमन विश्वविद्यालय और कलिंगा विश्वविद्यालय का पॉम्पलेट/बोर्ड लगाकर महज दो-दो कमरों के मकान से उच्च शिक्षा के नाम पर अवैध सेंटर का संचालन किया जा रहा है। मामले की जानकारी मिलते ही समाजसेवियों ने इसकी लिखित शिकायत उच्च शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग से करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
नियमित कोर्स का झांसा देकर प्रवेश
मिली जानकारी के अनुसार, इस सेंटर द्वारा क्षेत्र के मासूम छात्र-छात्राओं को भ्रमित कर नियमित (रेगुलर) कोर्स में एडमिशन दिए जा रहे थे। यहाँ BSc, MSc, BCA, BCom, PGDRD और PGDCA, DCA जैसे प्रमुख पाठ्यक्रमों में दाखिले के नाम पर मोटी रकम ऐंठी जा रही थी। सेंटर संचालक छात्रों को शासन की छात्रवृत्ति (Scholarship) दिलवाने तथा कंप्यूटर देने का प्रलोभन देकर अपने जाल में फंसाते थे।
पीड़ित छात्रों का दर्द: 25 हजार रुपये ऐंठे, न कंप्यूटर मिला न छात्रवृत्ति
इस फर्जीवाड़े का शिकार हुए कुछ पीड़ित छात्रों ने बताया कि उनसे एडमिशन के नाम पर ₹25,000 की वसूली की गई। संचालक ने भरोसा दिलाया था कि उनकी पूरी छात्रवृत्ति आ जाएगी, जिससे यह फीस एडजस्ट हो जाएगी और साथ में कम्प्यूटर भी निःशुल्क देंगे। लेकिन वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो कम्प्यूटर दिए गए, न ही कोई छात्रवृत्ति आई और न ही ढंग से पढ़ाई हुई। छात्रों का आरोप है कि अब जब वे अपने पैसे या अंकसूची की मांग करते हैं, तो उन्हें गोल-मोल जवाब दिया जाता है।
उच्च शिक्षा विभाग और विनियामक आयोग से शिकायत
मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र के समाजसेवियों ने फर्जी कंप्यूटर सेंटर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाजसेवियों ने उच्च शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
उठे बड़े सवाल:
- छत्तीसगढ़ के नामी विश्वविद्यालयों के पॉम्पलेट/बोर्ड लगाकर दो-दो कमरों में दुकान चलाने की हिम्मत इन संचालकों में कहाँ से आई?
- क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी की सरपरस्ती में यह खेल चल रहा था?
समाजसेवियों का कहना है कि यदि जल्द ही इस फर्जी संस्थान पर तालाबंदी कर संचालकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई, तो युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, इस शिकायत के बाद जिले के शिक्षा गलियारों और फर्जी कंप्यूटर सेंटरों में हड़कंप मच गया है।