अयोध्या। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में पुलिस की एक कार्रवाई पर सवाल उठ गए हैं। मामले के मुख्य आरोपी और पूर्व बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव का पेंशन खाता बंद करने के फैसले पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस से पूछा है कि यह कार्रवाई किस नियम के तहत की गई और क्या इसके लिए पहले कोर्ट से मंजूरी ली गई थी। इस पूरे मामले पर अब 27 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।
अदालत ने पुलिस से मांगा स्पष्टीकरण
जेल में बंद आरोपी सुभाष श्रीवास्तव ने 18 जुलाई को भ्रष्टाचार निवारण अदालत के सामने याचिका दायर की थी। उन्होंने अपने पेंशन खाते से लेन-देन पर लगी रोक हटाने की मांग की थी। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पुलिस से 21 जुलाई तक जवाब मांगा था। जांच अधिकारी ने अदालत में बताया कि सबूत जुटाने के लिए खाता बंद कराया गया था। हालांकि 25 जून 2026 के बाद खाते में आए पैसों के भुगतान पर पुलिस ने कोई आपत्ति नहीं जताई।
कानून और बचाव पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी अदालत को यह नहीं बता सके कि खाता रोकने के लिए किस कानूनी नियम का पालन किया गया। वहीं आरोपी के वकील का कहना था कि कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति का पेंशन खाता इस तरह बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने दलील दी कि अगर ऐसी कोई स्थिति बनती भी है तो पहले खाताधारक को लिखित सूचना दी जानी चाहिए। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की इस जल्दबाजी वाली कार्रवाई से अब उसके अपने ही कदम उलझते दिख रहे हैं।