नई दिल्ली। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतें छह हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा यमन के विद्रोहियों द्वारा शिपिंग को दी जा रही धमकियों के कारण यह तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी की तेजी के साथ 95.47 डॉलर पर पहुंच गया है।
इस तेजी के पीछे मिडिल ईस्ट में सप्लाई रूट का बंद होना और युद्ध जैसे हालात मुख्य वजह हैं। अमेरिकी सेना लगातार हमले कर रही है, जिससे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट के अलावा अब बाब अल-मंडेब स्ट्रेट भी एक बड़ा हॉट स्पॉट बनता जा रहा है। विद्रोही समूहों द्वारा तेल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकियों के बाद जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ रहा है। कई तेल टैंकरों ने जोखिम भरे रास्ते से बचने के लिए स्वेज नहर का रुख किया है, जिससे तेल आपूर्ति पर दबाव और बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के कारण आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं। हालांकि अमेरिका के हालिया आंकड़ों से पता चला है कि वहां कच्चे तेल के स्टॉक में कुछ बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव के कारण कीमतें लगातार ऊपर बनी हुई हैं। एशियाई देशों के रिफाइनर भी वैकल्पिक रास्तों से तेल मंगाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे ढुलाई का खर्च बढ़ रहा है और इसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।