मनरेगा योजना में होने वाली धांधली और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार ने निगरानी का दायरा बढ़ा दिया है। अब सरकारी कामकाज सिर्फ अधिकारियों की मेज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव के लोग खुद इसकी सीधी निगरानी कर सकेंगे। विकसित भारत जी-रामजी योजना के तहत निगरानी की व्यवस्था को अब पहले से अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया गया है।
जनता सूचना बोर्ड से खुलेगा हर राज
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा हथियार हर कार्यस्थल पर लगने वाला जनता सूचना बोर्ड है। अब किसी भी काम को शुरू करने से पहले वहां एक बोर्ड लगाया जाएगा। इस पर परियोजना की कुल लागत, स्वीकृत राशि, काम शुरू होने और खत्म होने की तारीख जैसी तमाम जानकारी लिखी होगी। इसके अलावा, कितने मजदूरों ने काम किया और कितने दिनों का काम हुआ, इसकी जानकारी भी बोर्ड पर दर्ज होगी। इससे गांव के लोगों को किसी भी जानकारी के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

कैसे रुकेगा फर्जीवाड़ा
अगर किसी काम को कागजों में पूरा दिखा दिया जाता है, जबकि जमीन पर काम अधूरा है, तो ग्रामीण तुरंत इसकी शिकायत कर सकेंगे। यदि बोर्ड पर 100 मजदूरों के काम करने का दावा किया गया है, लेकिन हकीकत कुछ और है, तो लोग सीधे सवाल उठा सकेंगे।
डिजिटल रिकॉर्ड से होगी तुरंत जांच
सोशल ऑडिट की पुरानी व्यवस्था को अब डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ दिया गया है। पहले रिकॉर्ड मिलान में काफी समय लग जाता था, लेकिन अब उपस्थिति और भुगतान का पूरा हिसाब डिजिटल होने से जांच करना आसान हो जाएगा। इससे फर्जी भुगतान और गलत मस्टर रोल जैसी शिकायतों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। यदि इस नई व्यवस्था को पूरी ईमानदारी से लागू किया गया, तो गांवों में होने वाले विकास कार्यों में फर्जीवाड़े की गुंजाइश न के बराबर रह जाएगी।