अक्सर लोग मानते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) उम्रदराज लोगों की बीमारी है, लेकिन बदलते दौर में अब बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। बच्चों में हाई बीपी का मिलना बेहद चिंताजनक है क्योंकि यह एक ‘साइलेंट कंडीशन’ है, जिसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते। अगर लंबे समय तक इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर बच्चे के दिल, किडनी, दिमाग और ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
कैलाश दीपक हॉस्पिटल के नवजात शिशु एवं बाल रोग विभाग के कंसल्टेंट डॉ. अविजीत प्रकाश यादव के अनुसार, पिछले कुछ सालों में बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर के मामले तेजी से बढ़े हैं। आइए जानते हैं कि बच्चों में यह बीमारी क्यों होती है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।
बच्चों में हाई बीपी होने की मुख्य वजहें
डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर के पीछे मुख्य रूप से दो तरह के कारण होते हैं:
खराब लाइफस्टाइल और मोटापा: बच्चों में बढ़ता वजन और शारीरिक निष्क्रियता (फिजिकल एक्टिविटी की कमी) इसका सबसे बड़ा कारण है।
आनुवंशिकी (Genetics): यदि परिवार में माता-पिता या किसी अन्य करीबी को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो बच्चों में इसका खतरा स्वतः ही बढ़ जाता है।
छिपी हुई बीमारियां (Secondary Causes): छोटे बच्चों में हाई बीपी का कारण सिर्फ मोटापा नहीं होता। कई बार किडनी की बीमारी, दिल की जन्मजात विकृति या हार्मोनल असंतुलन जैसी अंदरूनी गंभीर समस्याएं भी इसकी असली वजह होती हैं।
इन लक्षणों को मामूली समझकर न करें नजरअंदाज
शुरुआत में बच्चों में इसके कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलते और अक्सर रूटीन चेकअप के दौरान ही इसका पता चलता है। लेकिन ब्लड प्रेशर का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ने पर ये लक्षण दिख सकते हैं:
बार-बार तेज सिरदर्द होना या चक्कर आना।
आंखों के सामने धुंधलापन छाना।
हर समय अत्यधिक थकान महसूस होना।
पढ़ाई या किसी काम में ध्यान (Focus) लगाने में दिक्कत होना।
नाक से अचानक खून आना।
मेडिकल इमरजेंसी: यदि बीपी गंभीर रूप से बढ़ जाए, तो बच्चे को दौरे (Fits) भी पड़ सकते हैं, ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल भागना चाहिए।
बचाव के उपाय और पेरेंट्स के लिए जरूरी सलाह
डॉ. अविजीत के अनुसार, पेरेंट्स को बच्चे में लक्षणों के उभरने का इंतजार नहीं करना चाहिए। इससे बचाव के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं:
रूटीन चेकअप है जरूरी: यदि बच्चे का वजन ज्यादा है, उसे डायबिटीज या किडनी की बीमारी है, अथवा परिवार में बीपी की हिस्ट्री है, तो समय-समय पर उसका ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराएं।
एक्टिव लाइफस्टाइल: बच्चों को मोबाइल-टीवी स्क्रीन से दूर कर आउटडोर गेम्स और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।
संतुलित खानपान: बच्चों की डाइट में जंक फूड, अत्यधिक नमक और पैकेज्ड फूड की मात्रा कम करें। उन्हें हरी सब्जियां और फल खाने की आदत डालें।
समय पर पहचान होने से बच्चों में हाई बीपी को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सकता है।