Aluminum Foil Health Risks: भारतीय रसोइयों में रोटियां लपेटने से लेकर बेकिंग और ग्रिलिंग के लिए एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल एक आम चलन बन चुका है। आजकल फॉयल पेपर में मसालेदार सब्जियां या मीट लपेटकर ओवन में पकाने का नया ट्रेंड भी शुरू हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आसान सा दिखने वाला तरीका आपके शरीर में धीमा जहर घोल रहा है? इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इलेक्ट्रोकेमिकल साइंस में प्रकाशित एक हालिया रिसर्च (Risk Assessment of Using Aluminum Foil in Food Preparation) ने इस बात की पुष्टि की है कि फॉयल पेपर में खाना पकाने से खतरनाक मात्रा में एल्युमिनियम भोजन में घुल जाता है।
यूएई और मिस्र के केमिकल इंजीनियरों द्वारा की गई इस लैब रिसर्च में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो आपकी सेहत से जुड़े हैं।
खट्टी और मसालेदार चीजें बढ़ा देती हैं खतरा
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि जब एल्युमिनियम फॉयल भोजन के सीधे संपर्क में आता है, तो उसमें से धातु का रिसाव होने लगता है। हैरान करने वाली बात यह है कि जैसे ही खाने में टमाटर, नींबू, सिरका (विनेगर) या ज्यादा मसाले शामिल किए जाते हैं, एल्युमिनियम के पिघलकर खाने में मिलने की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है।
- एसिडिक रिएक्शन: खट्टी चीजों के कारण भोजन का पीएच (pH) लेवल गिर जाता है, जिससे केमिकल रिएक्शन तेज हो जाता है। टमाटर और साइट्रिक एसिड वाली सॉस के कारण प्रति व्यक्ति 22.8 से 132 मिलीग्राम तक एल्युमिनियम खाने में पहुंच गया।
- सिरका है सबसे खतरनाक: जब सॉस में सिरके (विनेगर) का इस्तेमाल किया गया, तो एल्युमिनियम का रिसाव सबसे ज्यादा पाया गया। सिरके वाली सॉस में लगभग 465 मिलीग्राम प्रति व्यक्ति एल्युमिनियम भोजन में घुल गया, जो सामान्य से तीन गुना ज्यादा है।
- तापमान का असर: ओवन में 90 मिनट तक फॉयल पेपर में लपेटकर खाना पकाने से तापमान बढ़ने के कारण भोजन में एल्युमिनियम का स्तर 361 मिलीग्राम प्रति व्यक्ति तक पहुंच गया।
कितना एल्युमिनियम है सुरक्षित और क्या है रिस्क?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार, एक वयस्क व्यक्ति के लिए प्रति सप्ताह उसके शरीर के वजन के हिसाब से प्रति किलोग्राम केवल 2 मिलीग्राम एल्युमिनियम का सेवन ही सुरक्षित माना जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी का वजन 68 किलोग्राम है, तो उसके लिए पूरे हफ्ते की सुरक्षित सीमा 136 मिलीग्राम है। लेकिन फॉयल पेपर में पकाया गया सिर्फ एक वक्त का खाना ही इस साप्ताहिक लिमिट को पार कर जाता है।
यद्यपि हमारा शरीर अतिरिक्त एल्युमिनियम को फिल्टर करके बाहर निकाल देता है, लेकिन लंबे समय तक इसका सेवन शरीर में भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
इन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा:
- किडनी के मरीज: क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित लोगों को इससे पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि उनकी किडनी धातु को फिल्टर नहीं कर पाती।
- डायलिसिस वाले मरीज: ऐसे मरीजों के शरीर में एल्युमिनियम जमा होने से न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें हो सकती हैं।
- छोटे बच्चे व शिशु: कम वजन होने के कारण बच्चों के शरीर पर इसका बहुत जल्दी और बुरा असर पड़ता है।
बचाव के स्मार्ट तरीके: आदतें बदलें, सेहत नहीं
एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना शायद व्यावहारिक न हो, लेकिन कुछ आसान बदलावों से आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं:
- बटर पेपर का सुरक्षा कवच: अगर आप ओवन में कुछ बेक कर रहे हैं या सैंडविच पैक कर रहे हैं, तो भोजन और एल्युमिनियम फॉयल के बीच में ‘बटर पेपर’ या ‘बेकिंग पेपर’ की एक परत जरूर लगाएं। इससे खाना सीधे धातु के संपर्क में नहीं आएगा।
- गर्म रोटियां तुरंत न लपेटें: तवे से रोटी उतारते ही उसे तुरंत फॉयल में न रखें। भाप और अत्यधिक गर्मी से रिसाव बढ़ जाता है। रोटियों को थोड़ा ठंडा होने दें या पहले कपड़े में लपेटकर फिर फॉयल का इस्तेमाल करें।
- कढ़ाई या बर्तनों को प्राथमिकता दें: टमाटर, नींबू या सिरके से बनने वाली खट्टी और मसालेदार डिशेज को फॉयल पेपर में पकाने या बेक करने की गलती बिल्कुल न करें। इन्हें पारंपरिक बर्तनों में ही पकाएं।