10 हजार गानों के उस जादूगर की कहानी, जिसने बदल दिया संगीत का इतिहास!

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में संगीत का इतिहास बेहद सुनहरा रहा है। यहाँ कई ऐसे दिग्गज कलाकार हुए हैं जिन्होंने संगीत की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया। किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर जैसे महान गायकों ने अपनी आवाज से करोड़ों दिलों पर राज किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे के पीछे एक ऐसा जादूगर भी था जिसने अकेले 10000 से ज्यादा गीत लिखे और उनके सुर तैयार किए। उनके धुनों की दुनिया आज भी दीवानी है।

दिग्गज गायकों ने दी इनके सुरों को आवाज

भारतीय संगीत की दुनिया में अविनाश व्यास एक ऐसा नाम है जिनका काम सदियों तक याद रखा जाएगा। उन्होंने अपने पूरे सफर में 10000 से अधिक गानों की रचना की। उन्होंने न सिर्फ हिंदी बल्कि गुजराती सिनेमा को भी एक नया मुकाम दिया। उनकी बनाई धुनों पर लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे कल्ट क्लासिक गायकों ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा था।

मोहम्मद रफी और लता के वो मशहूर गाने

मोहम्मद रफी ने उनके संगीत निर्देशन में फिल्म लक्ष्मी के लिए एक बेहद लोकप्रिय गाना गाया था। वहीं लता मंगेशकर ने फिल्म मेहंदी रंग लग्यो के लिए और फिल्म कैलाशपति के लिए कई यादगार गाने गाए। उनके काम की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उस दौर के हर बड़े गायक जैसे मुकेश, मन्ना डे, आशा भोंसले और किशोर कुमार ने उनके साथ काम करने को अपना सौभाग्य माना।

उस्ताद अलाउद्दीन खान से सीखी संगीत की बारीकियां

अविनाश व्यास का जन्म 1912 में गुजरात में हुआ था। उन्होंने संगीत की शुरुआती और कड़े नियम वाली शिक्षा उस्ताद अलाउद्दीन खान से ली थी। इसके बाद उन्होंने साल 1948 में आई फिल्म गुणसुंदरी से अपनी पहली बड़ी सफलता हासिल की। यह फिल्म हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं में बड़े पर्दे पर रिलीज हुई थी।

देश का चौथा सबसे बड़ा सम्मान मिला

सिनेमा के अलावा उन्होंने सैकड़ों लोकगीत और भक्ति से भरे भजनों की भी रचना की। यही वजह है कि साल 1970 में भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्म श्री से नवाजा था। संगीत के प्रति उनका यह समर्पण आज के नए कलाकारों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है।

10 हजार गानों के उस जादूगर की कहानी, जिसने बदल दिया संगीत का इतिहास!

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में संगीत का इतिहास बेहद सुनहरा रहा है। यहाँ कई ऐसे दिग्गज कलाकार हुए हैं जिन्होंने संगीत की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया। किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर जैसे महान गायकों ने अपनी आवाज से करोड़ों दिलों पर राज किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे के पीछे एक ऐसा जादूगर भी था जिसने अकेले 10000 से ज्यादा गीत लिखे और उनके सुर तैयार किए। उनके धुनों की दुनिया आज भी दीवानी है।

दिग्गज गायकों ने दी इनके सुरों को आवाज

भारतीय संगीत की दुनिया में अविनाश व्यास एक ऐसा नाम है जिनका काम सदियों तक याद रखा जाएगा। उन्होंने अपने पूरे सफर में 10000 से अधिक गानों की रचना की। उन्होंने न सिर्फ हिंदी बल्कि गुजराती सिनेमा को भी एक नया मुकाम दिया। उनकी बनाई धुनों पर लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे कल्ट क्लासिक गायकों ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा था।

मोहम्मद रफी और लता के वो मशहूर गाने

मोहम्मद रफी ने उनके संगीत निर्देशन में फिल्म लक्ष्मी के लिए एक बेहद लोकप्रिय गाना गाया था। वहीं लता मंगेशकर ने फिल्म मेहंदी रंग लग्यो के लिए और फिल्म कैलाशपति के लिए कई यादगार गाने गाए। उनके काम की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उस दौर के हर बड़े गायक जैसे मुकेश, मन्ना डे, आशा भोंसले और किशोर कुमार ने उनके साथ काम करने को अपना सौभाग्य माना।

उस्ताद अलाउद्दीन खान से सीखी संगीत की बारीकियां

अविनाश व्यास का जन्म 1912 में गुजरात में हुआ था। उन्होंने संगीत की शुरुआती और कड़े नियम वाली शिक्षा उस्ताद अलाउद्दीन खान से ली थी। इसके बाद उन्होंने साल 1948 में आई फिल्म गुणसुंदरी से अपनी पहली बड़ी सफलता हासिल की। यह फिल्म हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं में बड़े पर्दे पर रिलीज हुई थी।

देश का चौथा सबसे बड़ा सम्मान मिला

सिनेमा के अलावा उन्होंने सैकड़ों लोकगीत और भक्ति से भरे भजनों की भी रचना की। यही वजह है कि साल 1970 में भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्म श्री से नवाजा था। संगीत के प्रति उनका यह समर्पण आज के नए कलाकारों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है।

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