प्राचार्यों की मनमानी पर उच्च शिक्षा विभाग सख्त, अतिथि व्याख्याताओं के नियुक्ति आदेश निरस्त

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग से इस वक्त की एक बेहद गर्मागरम और बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं (Guest Lecturers) की दोबारा नियुक्ति को लेकर प्राचार्यों की ‘मनमानी’ और शासन के कड़े रुख के बीच एक बड़ा टकराव पैदा हो गया है। बिना विभागीय अनुमति के पिछले दरवाजे से चहेतों को जॉइनिंग देने वाले प्राचार्यों को उच्च शिक्षा मंत्री और शीर्ष अधिकारियों ने ऐसी सख्त फटकार लगाई है कि कॉलेजों को चंद घंटों के भीतर अपने आदेश वापस लेने पड़े हैं।

बिना अनुमति धड़ाधड़ बांटे जा रहे थे जॉइनिंग लेटर
सूत्रों के मुताबिक, बिलासपुर संभाग, सरगुजा संभाग, आत्मानंद महाविद्यालय, बेमेतरा के पंडित जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय और शासकीय नवीन महाविद्यालय अकलतरी समेत प्रदेश के कई सरकारी कॉलेजों से प्राचार्यों की मनमानी का मामला सामने आया है। इन प्राचार्यों ने उच्च शिक्षा विभाग के मुख्य गाइडलाइन का इंतजार किए बिना ही, अपने स्तर पर अतिथि व्याख्याताओं की पुनः नियुक्ति (Re-appointment) के लिखित आदेश धड़ाधड़ जारी कर दिए थे।

अतिथि व्याख्याताओं का भी आरोप रहा है कि कई प्राचार्य दोहरा रवैया अपनाते हैं—जब किसी को हटाना होता है तो 11 महीने के कार्यकाल का हवाला देकर निकाल देते हैं, और जब अपनों को उपकृत करना होता है तो बिना विभाग की मंजूरी के ही जॉइनिंग लेटर थमा देते हैं।

अधिकारियों की ‘टेलीफोनिक डांट’ और प्राचार्यों का ‘यू-टर्न’
जैसे ही यह मामला उच्च शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों और मंत्री के संज्ञान में आया, मंत्रालय से फोन घनघनाने शुरू हो गए। नियमों को ताक पर रखकर आदेश जारी करने वाले प्राचार्यों को शीर्ष स्तर से टेलीफोन पर कड़ी फटकार लगाई गई।

इस डांट का असर इतना तगड़ा था कि जिन प्राचार्यों ने उत्साह में आकर नियुक्ति के आदेश जारी किए थे, उन्हें तुरंत ‘यू-टर्न’ लेना पड़ा। वर्तमान में विभाग के निर्देश और प्राचार्यों के घबराहट में जारी किए गए निरस्तीकरण (Cancellation) के आदेश सोशल मीडिया और WhatsApp पर तेजी से तैर रहे हैं।

खेल समझिए: पहले बुलावा, फिर नो-एंट्री का बोर्ड
डिजिटल दौर में कॉलेजों की जो फजीहत सामने आई है, उसकी प्रक्रिया कुछ इस तरह रही:

पहला आदेश: प्राचार्यों ने बकायदा लिखित लेटर जारी कर अतिथि व्याख्याताओं, ग्रंथपालों (Librarian) और क्रीड़ा अधिकारियों (Sports Officer) को एक निश्चित तिथि पर कॉलेज आकर ड्यूटी जॉइन करने को कहा।

दूसरा आदेश (फटकार के बाद): विभाग से डांट पड़ते ही प्राचार्यों ने नया आदेश जारी किया। इसमें साफ लिखा गया—”पूर्व में जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित/निरस्त किया जाता है। संबंधित स्टाफ आगामी आदेश तक महाविद्यालय में उपस्थित न हों।”

1 अगस्त से लागू होगी ‘नई नीति’, केंद्रीयकृत होंगी नियुक्तियां
उच्च शिक्षा विभाग इस बार ‘सूटकेस और रसूख’ वाली इस पुरानी परिपाटी को खत्म करने के मूड में है। विभाग एक नई नीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत 1 अगस्त के आसपास पूरे प्रदेश के महाविद्यालयों में एकमुश्त (फिक्स) वेतनमान के साथ एक साथ (Centralized) नियुक्तियां की जानी हैं।

निष्कर्ष: शासन का संदेश लाउड एंड क्लियर है—जब तक रायपुर मुख्यालय से आधिकारिक गाइडलाइन जारी नहीं होती, तब तक कोई भी प्राचार्य अपने स्तर पर कॉलेज में किसी को भी जॉइन नहीं करा सकता। फिलहाल, प्रभावित अतिथि व्याख्याताओं और अन्य स्टाफ को अब शासन के अंतिम आदेश का ही इंतजार करना होगा।

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