नकटी में किसकी कटी नाक
इन दिनों राज्य में रायपुर के गांव नकटी में चले सरकारी बुलडोजर और वहां बनने वाली विधायकों की कालोनी को लेकर जमकर बवाल मचा हुआ है। रायपुर के धरमपुरा से लगा गांव नकटी है, जहां भाठा जमीन पर सत्तर से अधिक परिवार कच्चे और पक्के मकान बनाकर वर्षों से रह रहे थे। इसी इलाके में राज्य सरकार विधायकों की एक बड़ी कालोनी बना रही है, जिसके लिए सरकार ने इस गांव को खाली करने का नोटिस दिया और खाली ना होने पर बुलडोजर चला दिया। यहाँ रहने वाले परिवारों को नया रायपुर में एक कमरे के सुविधा विहीन मकान देकर सरकार ने नैतिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। पिछले चार पांच दिनों से अखबार के पन्ने, टीवी की स्क्रीन और पूरा सोशल मीडिया नकटी गांव के निवासियों की दु:ख भरी दास्तान से भरा पड़ा है। यह कहना बिलकुल गलत नहीं होगा कि इतनी बेतरतीब विस्थापन की कार्रवाई प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुई। इस कार्रवाई ने सरकार के लुंज पुंज रवैये को तो उजागर किया। साथ ही जनप्रतिनिधियों की लगभग मर चुकी नैतिकता को भी बेनकाब किया है। इस घटना से कई सवाल खड़े हो रहे हैं जिनका जवाब मिलना ही चाहिए। पहली बात जब सरकार नया रायपुर में सारे निर्माण कर रही है तो विधायकों की कालोनी वहां क्यों नहीं बन सकती थी। दूसरी बात प्रदेश के सभी गांव में हमेशा होता है कि ग्रामीण गांव से बाहर भाठा जमीन पर निर्माण कर लेते हैं और वहां पूरा जीवन बिता देते हैं। नकटी में भी ऐसा ही हुआ इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिया गया। साथ ही हर सरकारी सुविधा भी दी जा रही थी। पहले की भाजपा सरकार ने भी रायपुर शहर में झुग्गियों में रह रही बड़ी आबादी को व्यवस्थित तरीके से विस्थापित किया तो इस मामले में ऐसी क्या हड़बड़ी थी? सत्तर परिवार कोई बड़ी आबादी नहीं होती। आसानी से इस काम को अंजाम दिया जा सकता था। जिस इलाके में ये कालोनी बन रही है, वहीं एक बहुमंजिला ईमारत बनाकर इन्हे विस्थापित कर सकते थे। तब तक के लिए इन परिवारों की अस्थाई व्यवस्था नया रायपुर में हो सकती थी। दरअसल, यह मामला इतना बड़ा था, नहीं लेकिन लिजलिजे प्रशासन ने इसे सरकार के गले की हड्डी बना दिया। अब सरकार के लोग सफाई देते फिर रहे हैं। जब पहले दिन बुलडोजर चला तब किसी राजनीतिक दल का नेता वहां नहीं पहुंचा। स्थानीय विधायक अनुज शर्मा ने उनके खाने-पीने की व्यवस्था कर दी। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी गांव वालों से कहा था कि बिना विस्थापन के घर मकान नहीं टूटेंगे। फिर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पीडि़तों से मिलने पहुंचे तो राजनीति गरमा गई। कांग्रेस के तीन विधायकों ने लिखकर दे दिया कि वे इस कालोनी में बंगला नहीं लेंगे। कांग्रेस विधायकों के इस फैसले ने आग में घी का काम कर दिया। अब विपक्ष का सरकार पर हमला और पैना होता जा रहा है। कांग्रेस, भाजपा विधायकों को चुनौती दे रही है कि हिम्मत है तो भाजपा विधायक भी इस कालोनी में बंगला लेने से मना करके दिखाएं? पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना को भाजपा के आपसी मनमुटाव का नतीजा बता दिया। उन्होंने कहा कि नकटी गांव के लोग सांसद बृजमोहन अग्रवाल की बजाय किसी मंत्री के पास चले जाते तो उनका घर नहीं टूटता। बताया जा रहा है कि नकटी गांव के आसपास एक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, एक पूर्व मंत्री और एक उद्योगपति की सैकड़ों एकड़ जमीन है। प्रदेश के एक प्रभावशाली मंत्री इन जमीनों का भाव बढ़ाने के लिए नया रायपुर और रायपुर के बीच एनआरडीए के बड़े आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट ला रहे हैं, जिससे नकटी, सरीखेड़ी, मंदिर हसौद, रीको, रामचंदी और बरोदा तक विकास होने वाला है। लगभग आठ सौ करोड़ की इस परियोजना में नेता,अभिनेता,अफसर,व्यापारी,जमीन दलाल सबके दिन बदल जायेंगे और जिनके घर टूटे हैं वो दर दर की ठोकर खाएंगे।
बॉडी बिल्डर ब्यूरोक्रेट
प्रदेश के 2009 बैच के आईएएस अफसर अवनीश शरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। जब वह बलरामपुर में कलेक्टर थे, तब उन्होंने अपनी बिटिया का वहीं के सरकारी स्कूल में दाखिला कराया था। आम बच्चों के साथ अपने बच्चे को भी पढ़ाने का उनका फैसला उस समय खूब सराहा गया था। वर्तमान में अवनीश शरण रायपुर विकास प्राधिकरण में मुख्य कार्यपालन अधिकारी हैं। बताते हैं कि कोरोना बीमारी के बाद उनका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उसके बाद उन्होंने तय किया कि जिम में मेहनत कर वे अपना शरीर सुडौल बनाएंगे और करीब छह महीने की मेहनत के बाद वे कामयाब भी हुए और उन्होंने अपनी तस्वीर सोशल मीडिया में पोस्ट कर दी जो जल्द ही खूब वायरल हो गई। हालांकि कुछ लोग उन्हें ट्रोल भी कर रहे तो कुछ लोग उनसे ईष्या भी कर रहे हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के कुछ अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के वीडियो और फोटो हम पोस्ट कर देते तो नियमों का हवाला देकर हम पर कार्रवाई हो जाती। खैर, जिसे जो राय बनानी हो बनाये लेकिन शरीर को बलिष्ठ बनाना किसी भी तरह से बुरा नहीं माना जाता। लोग इस आईएएस के बदले हुए स्वरूप से हैरान हैं। अब लोग इन्हे बॉडी बिल्डर ब्यूरोक्रेट कह रहे हैं।
दारू पीकर अफसर का हंगामा
इन दिनों राज्य के मंत्रालय में एक आईएएस अफसर का शराब पीकर हंगामा करने की घटना पर बहुत चर्चा हो रही है। बताते हैं कि प्रदेश के ये ऊर्जावान और उद्यमी आईएएस अधिकारी सरकारी कामकाज के सिलसिले में पड़ोसी राज्य ओडिशा गए थे। वहां एक बड़ी होटल में कार्यक्रम था, जिसमें जनाब शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद रात में इस अधिकारी महोदय ने इतनी शराब पी ली कि इन्हे होटल में अपना कमरा तक याद नहीं रहा। शराब के नशे में इन्होने दो चार दूसरे कमरों में दस्तक दे दी। बाद में होटल के स्टाफ ने उन्हें उनके कमरे में भेजा। नशा इतना जोरदार था कि इनकी सुबह की फ्लाइट भी निकल गई, क्योंकि ये महोदय समय पर एयरपोर्ट नहीं पहुंच पाए। एयरपोर्ट से वापस यह अधिकारी होटल पहुंचे तो होटल वालों ने कमरा देने से मना कर दिया। इसका कारण बीती रात होटल वाले इनका तमाशा देख चुके थे। बहरहाल, किसी तरह अफसर महोदय वापस रायपुर लौट आये।
आडियो में कितनी सच्चाई
इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के एक मंडल अध्यक्ष और प्रदेश के एक मंत्री की कथित बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है। इस ऑडियो को सुनने से यह समझ में आ रहा है कि भाजपा का एक मंडल अध्यक्ष प्रदेश के एक मंत्री को फोन करता है और दूसरी ओर से बात कर रहे व्यक्ति का जवाब होता है कि मैं मंत्री जी का पीए बोल रहा हूँ और मंत्री जी सो गए हैं। भाजपा का यह नेता शिकायती लहजे में कहता है कि हमारा कोई फोन नहीं उठाता और वह निवेदन करता है कि नकटी में ग्रामीणों के घर न तोड़े जाएं उन्हें समय दिया जाय, ताकि वे अपनी व्यवस्था कर लें। इस वायरल ऑडियो पर कांग्रेस कह रही है कि मंत्री जी ने अपने ही कार्यकर्त्ता को गुमराह कर दिया, फ़ोन पर आकर भी कह दिया कि मंत्री जी सो गए हैं। इस ऑडियो के वायरल होने के बाद भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने पुलिस में शिकायत की और आरोप लगाया कि एआई के जरिये मंत्री जी की आवाज बनाकर उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। इस ऑडियो की सच्चाई तो जांच के बाद सामने आएगी। फिलहाल राज्य भर में यह ऑडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।