ग्राम पंचायत भरतपुर का बड़ा खुलासा,, वन विभाग को पत्र लिख कार्रवाई की मांग, कलेक्टर से लेकर खनिज अधिकारी तक खटखटाया दरवाजा
सूरजपुर / जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भरतपुर में भू-माफिया और अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे अब सरकारी और सामुदायिक वन भूमि को भी अपना निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं। ग्राम पंचायत भरतपुर की ग्राम सभा को मिले सामुदायिक वन संसाधन के पट्टे की भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण और अवैध रूप से पत्थरों का उत्खनन धड़ल्ले से जारी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत और सामुदायिक वन प्रबंधन समिति ने मोर्चा खोल दिया है। वनमंडलाधिकारी सूरजपुर को सौंपे गए एक कड़े शिकायती पत्र में पंचायत ने न सिर्फ अतिक्रमणकारियों का नामजद खुलासा किया है, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री आवास के नाम पर अतिक्रमण का खेल
शिकायती पत्र के अनुसार, ग्राम पंचायत भरतपुर की ग्राम सभा के वन संसाधन अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाली भूमि P.1757 रकबा 143.25 हेक्टेयर पर अवैध कब्जे का खेल चल रहा है। ग्राम सलका के निवासी रामसागर सीताराम और सीताराम सुदन द्वारा इस बेशकीमती वन भूमि पर जबरन प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कर अतिक्रमण किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि वन भूमि पर प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति और निर्माण किसकी शह पर हो रहा है

पहाड़ का सीना चीर रहे खनन माफिया, जड़ से उखाड़े जा रहे पेड़
शिकायत में सबसे चौंकाने वाला और चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि ग्राम सलका के कुछ ग्रामीणों द्वारा इस संरक्षित क्षेत्र में भारी मात्रा में पत्थरों का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। पत्थर निकालने के लालच में माफिया द्वारा पहाड़ के हरे-भरे पेड़ों को जड़ से उखाड़ा जा रहा है जिससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।


स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस खेल से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
कलेक्टर से लेकर खनिज अधिकारी तक भेजी गई प्रतिलिपि
इस मामले को लेकर ग्राम पंचायत भरतपुर के सरपंच, सचिव और सामुदायिक वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष व सचिव ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर कर प्रशासन को चेतावनी दी है। पत्र की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जिला खनिज अधिकारी, तहसीलदार और मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी सूचनार्थ और तत्काल कार्रवाई हेतु भेजी गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्या प्रशासन इस मामले में कुंभकर्णी नींद से जागेगा क्या पेड़ों को जड़ से उखाड़ने वाले और वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले रसूखदारों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा, या फिर कागजी कार्रवाई की औपचारिकता निभाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? ग्रामीणों को अब वन विभाग और जिला प्रशासन के कड़े एक्शन का इंतजार है।