अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों के बीच ही आपसी विवाद शुरू हो गया है। पहली बार ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर सीधे आरोप लगाए हैं। महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि इस पूरे मामले में गलती गोपाल राव की है और वे राजनीति कर रहे हैं। वे सबको उलझा देते हैं और राम की परंपरा को नहीं मानते हैं। बता दें कि गोपाल राव मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं और वे राम मंदिर के निर्माण प्रभारी होने के साथ-साथ ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य भी थे।
सड़क पर उतरे 500 से ज्यादा वकील, केस दर्ज करने की मांग
इस पूरे विवाद के बीच अयोध्या में सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर 500 से ज्यादा वकील विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़क पर उतर आए। सभी वकील चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। वकीलों ने सिविल लाइन पुलिस चौकी जाकर इन तीनों समेत 4 लोगों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने बताया कि पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
आरोपियों के नए मकानों पर चलेगा बुलडोजर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चढ़ावा चोरी के आरोपियों के खिलाफ सरकार बेहद कड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रशासन ने इन आरोपियों के नए बने घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने ऐसे घरों की पहचान कर ली है जिनका सरकारी नक्शा पास नहीं है या जिन्होंने निर्माण के नियमों को तोड़ा है। विशेष रूप से उन आरोपियों के घर प्रशासन की नजर में हैं जो उन्होंने राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद बनवाए थे। इसमें आरोपी लवकुश मिश्रा का शहादतगंज में बन रहा मकान और अनुकल्प मिश्रा का कौशल पुरी स्थित मकान शामिल है। विकास प्राधिकरण आज ही इन लोगों को नोटिस भेज सकता है।
ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से आज हो सकती है पूछताछ
इस मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने 30 जून को अयोध्या जेल में बंद आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ की थी। इससे पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी रविवार को 3 घंटे तक पूछताछ की जा चुकी है। अब चंपत राय के बयानों का मिलान करने के लिए पुलिस आज ट्रस्ट के एक और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा से पूछताछ कर सकती है। पुलिस मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल करेगी कि आरोपी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा को मंदिर में नौकरी पर रखने में अनिल मिश्रा की क्या भूमिका थी।
अब तक 8 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था। इसके बाद 25 जून को इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज की गई और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसी बड़ी कार्रवाई वाले दिन मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।